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सफर ज़िन्दगी का

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12 -Jan-2018 Jyoti Woman Poems 0 Comments  197 Views
Jyoti

खवाबो और ख्वाहिशों के साथ
सफर ज़िन्दगी का महकता रहा
वक़्त दिन ,महीनों और सालो
में गुजरता रहा

आ गया है नया साल फिर
सोचती हूँ क्या बदलेगा
मेरी ज़िन्दगी में
वही मोह , प्रेम ,दर्द के
बन्धनों में बंधी मैं

अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह
करती जाती हूँ
इतने साल गुजारे
ए ज़िन्दगी साथ तेरे
अनगिनत यादों का सफर


कुछ लम्हे खुशियों के
कुछ लम्हे अनजाने से
बदलेगा कौन किसे
उम्र के इस पड़ाव पर
जब सब अपनी - अपनी
ज़िंदगी मे व्यस्त है

बदलेगा कौन किसे
हाँ ! शायद खुद को
ही बदलना है अब
खुद के लिये जीना है
इस नये साल में
नयी सोच बनानी है

जीना है खुद के लिये भी
खुशियों को महसूस करना है
हर लम्हा खास बनाना है
नया साल नयी सोच
जीवन के प्रति



Dedicated to
All womens

Dedication Summary
ये मेरी कविता उन सभी महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने अपनी सारी ज़िन्दगी बच्चों
और परिवार को दी वो ये भूल गयी थी कि उन्हें भी ज़िन्दगी जीनी है अब जब सब
अपनी ज़िन्दगियों में व्यस्त है तो उन्हें खालीपन का अहसास होता है और उन्हें लगता
है कि अब किसी को उनकी जरूरत नही है और वो उदास रहने लगती है
अब उन्हें। अपनी सोच बदलनी है और ज़िन्दगी के हर पल को जीना है


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