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Saint Mother Taresa

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05 -Sep-2016 Anupama Gupta Kesharwani Miscellaneous Poems 0 Comments  758 Views
Anupama Gupta Kesharwani

आदमी,मसीहा बन जाए
क्या यह चमत्कार से कम है ?
अपने स्वार्थों से ऊपर उठ जाएं
कितनों में यह दम है?

हम भटकते हैं स्वार्थ के व्यापारों में
उसे ख़ुशी मिली,गरीबों के गलियारों में।
सफ़ेद-सूती धोती,उसकी पहचान थी
जिनकी सेवा की,उनसे अनजान थी।
सिर्फ़ मानवता का नाता था
उसे दिखावा नहीं आता था।

हम उसे संत कहने पर झगड़ रहे थे
चमत्कारों की गिनती पर अड़ रहे थे
क्या हम पहले 'मानव' बन कर दिखाएंगे
ख़ुद को मानवता की परिभाषा सिखाएंगे?

नाम,देश,परिजन सब छोड़
उसने मानवता अपनाई
इसीलिए वह संत कहलाई।

(कविता मूलतः अगस्त 2010 में संत मदर टेरेसा के जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर लिखी गई।कुछ सुधार के साथ,पुनः प्रस्तुत है।)

Saint Mother Taresa


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