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समंदर साथ ना दे तो.. तालाबों से गिला क्या हो.

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29 -Aug-2021 Deepak Tomar Life Poem 0 Comments  386 Views
Deepak Tomar

समंदर साथ ना दे तो..
तालाबों से गिला क्या हो..
जो ठहरी हो मेरी मंजिल..
तो राहों से गिला क्या हो..
बता देंगे बता कर हम
ये बातें भूल जाते हैं...
मेरे सपने भी तो अक्सर
अपनों में धूल खाते हैं...
कि समझूं मैं या समझाऊं..
कोई समझे न माने है..
मुझे जिल्लत ये देते हैं
जो मुफलिसी के तराने है..
सुन सुन कर ये दिल रोए
मेरे अपनों के ताने है..
मैं कुछ कर नहीं सकता
सिवाय मौन रहने के...
कुछ मौसम का रुख ऐसा
कुछ किस्से हैं कहने के..

समंदर साथ ना दे तो.. तालाबों से गिला क्या हो.


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