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सपनों का भारत

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07 -Sep-2021 Yuva Dream Poems 0 Comments  401 Views
सपनों का भारत

गीत नया फिर कोई गाऊंगा
स्वर आशाओं के नए सजाऊँगा।
अभी देख रहा हूँ दुर्दिन दैन्यता के
स्वप्न नूतन फिर कोई लाऊँगा
गीत नया फिर कोई गाऊंगा।

अभी द्वंद है धर्मयुद्ध का,
अभी द्वंद है प्रत्यारोपों का।
अभी द्वंद है भाव-विचारों का
ऊंच नीच का, स्वघोषित श्रेष्ठ का।
इन सब से मुक्त नया गौरव लाऊँगा
गीत नया फिर कोई गाऊंगा।

अभी द्वंद है क्षुधातृप्त की
अभी द्वंद है सीमाओं की।
अभी द्वंद है भारत के अस्तित्व की,
अभी द्वंद है सत्ता के गलियारों का।
ऋषिश्रेष्ठ भारत फिर पाऊंगा
इस आशा में
गीत नया फिर कोई गाऊंगा
स्वर आशाओं के नये सजाऊँगा।

सपनों का भारत


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