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सरकस का था काला भालू

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20 -Sep-2018 अशोक कुमार ढोरिया Kids Poem 2 Comments  511 Views
सरकस का था काला भालू

सरकस का था काला भालू
नाम था उसका झबरू कालू
सबको प्यारा नाच दिखाता
खाता था वह मीठे आलू।
जैसा मिलता वह खाता था
बंद पिंजरे में पाता था
दिखा खेल तमाशा गजब का
नींद चैन की वह सोता था।
जोकर बोना उसका याड़ी
उसके सह करता खिलवाड़ी
बांध कमर में सुंदर साड़ी।
दर्शक भीड़ थी बड़ी भारी
अब भी भालू की थी बारी
होंसला बढ़ाते भालू का
बजा ताली नर और नारी।

अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा
सम्पर्क न० 9050978504



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2 More responses

  • poemocean logo
    Dheeraj (Guest)
    Commented on 26-September-2018

    Sarkas ka tha kala behalu bal kavita bahut pasand aaee.

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    अशोक कुमार ढोरिया (Guest)
    Commented on 23-September-2018

    बाल कविता बहुत अच्छी लगी.

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