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सतयुग का रावण

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सतयुग का रावण / Satyug ka Ravan: This Hindi poem on Dussehra describe how the Ravana of Rama's era was more better than today's people. Although Ravana kidnapped Sita but he always gave respect to her and never tried to do bad things with her forcefully.

20 -Sep-2019 Suman Kumari Dussehra Poems 0 Comments  1,446 Views
सतयुग का रावण

रावण बनना भी कहां आसान था,
अहंकार था तो पश्चाताप भी था..!
वासना थी तो संयम भी था..!
सीता के अपहरण की ताकत थी,
तो बिना सहमति
पर स्त्री को स्पर्श ना करने का संकल्प भी था...!

सीता जीवित मिली ये राम की ताकत थी,
पर....
सीता पवित्र मिली ये रावण कि मर्यादा थी...!
राम तुम्हारे युग का रावण अच्छा था...!
दसों चेहरों पर बहार रखता था..!


मै इस कविता के माध्यम से संदेश देना चाहती हूं कि रावण में अहंकार था जिसकी सजा तो उसका अंत रहा ..! लेकिन आधुनिक समाज में उसके सकारात्मक पक्ष की ओर ध्यान आकर्षित कर उसकी उपलब्धि से सीखा जा सकता है बशर्ते हम सीखना चाहे, और हमें कोशिश भी करनी चाहिए कि
हम उन नैतिक मूल्यों को व्यवहार और आचरण में लाएं...!

सुमन...✍️

सतयुग का रावण


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