Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

असभ्य लंगूर

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13 -Feb-2020 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Save Trees Poems 0 Comments  707 Views
असभ्य लंगूर

जंगल के सारे लंगूर , खाते थे मीठे अंगूर , कितुं मनु पुत्रों को कहां सहूर , सब जंगल कर दिये चकना चूर, कितनों को घर से किया दूर , अब जब मर्कट झांके हाट बजार, तो कहते - देखो आगये वो असभ्य लंगूर ll जंगल के सारे लंगूर , आम खाने म

पेड़ों की व्यथा।

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07 -Nov-2019 Anil Mishra Prahari Save Trees Poems 1 Comments  851 Views
पेड़ों की व्यथा।

बेदर्दी मत काट बदन मेरा दुखता है। मार कुल्हाड़ी काट रहा है टुकड़े - टुकड़े बाँट रहा है, मेरी छाया से क्यों वैर? चाहूँ तेरी हरदम खैर। निर्मोही रुक, देख सलिल तेरा सुखता है। बेदर्दी मत काट बदन मेरा दुखता है। पहले धड़ ऊ

Save tree

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03 -Sep-2019 Suman Kumari Save Trees Poems 0 Comments  484 Views
Save tree

देखो वृक्षों की यह मार्मिक दशा जी अब मेरा घबराता है वृक्षों बिना नहीं है अस्तित्व कोई, क्यों मानव समझ न पाता है...? जिसने दिया हमको सहारा, उसको ही बेसहारा छोड़ जाता है...! वृक्ष ही जीवन का आधार है , इसे है मानव काटने को

Manav van sampada mitata

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19 -Jun-2019 Harjeet Nishad Save Trees Poems 0 Comments  470 Views
Manav van sampada mitata

Manav van sampada mitata. Ped kat ker nager basata. Pashu pakshi ki chhavn chhin ker, Manav khud ko bada batata. Kooler men pani panhunchta. Pedon ki na pyas bujhata. Badhati garmi chadhata para. Per manav ko samajh na ata. Dushit gas ped pi jate. Shuddh vayu hamako lautate. Hari bhari ho dharati apani, Ped lagayen ped na kate.

Vriksh Lagayenge

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31 -Mar-2018 Madan Devda Save Trees Poems 1 Comments  798 Views
Vriksh Lagayenge

Paryavaran pardushan ke hit, hum sab vriksh lagayenge. Karamveer ban iss dharti ko, fir se swarg banayenge. nai chetna, nai yojna, naye lakshaya apnayenge. gaon-gaon failse khushhaali, aisi yukti lagayenge.

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