Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Manav van sampada mitata

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19 -Jun-2019 Harjeet Nishad Save Trees Poems 0 Comments  152 Views
Manav van sampada mitata

Manav van sampada mitata. Ped kat ker nager basata. Pashu pakshi ki chhavn chhin ker, Manav khud ko bada batata. Kooler men pani panhunchta. Pedon ki na pyas bujhata. Badhati garmi chadhata para. Per manav ko samajh na ata. Dushit gas ped pi jate. Shuddh vayu hamako lautate. Hari bhari ho dharati apani, Ped lagayen ped na kate.

Vriksh Lagayenge

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31 -Mar-2018 Madan Devda Save Trees Poems 1 Comments  507 Views
Vriksh Lagayenge

Paryavaran pardushan ke hit, hum sab vriksh lagayenge. Karamveer ban iss dharti ko, fir se swarg banayenge. nai chetna, nai yojna, naye lakshaya apnayenge. gaon-gaon failse khushhaali, aisi yukti lagayenge.

व्यथा वृक्ष की

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25 -Jan-2018 रजनीश झा Save Trees Poems 0 Comments  363 Views
व्यथा वृक्ष की

क्यो काटते हो मुझे मैं तो जीवन देता हूं स्वयं ना लेकर अपना कुछ भी फल तुमको दे देता हूं।। चोट तुम्हारी कुल्हाड़ी का हर पल सहता रहता हूँ जब तक अंतिम स्वास चलती है मेरी प्राणवायु ही देता रहता हूँ।। फिर क्यों काटते हो

*****हम किसान*****

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30 -Jun-2017 Jugal Milan Save Trees Poems 0 Comments  707 Views
*****हम किसान*****

बरस बरस बरसो रे मेघा तन मन भींगा-भीगा ये आँगन भींगा है सारा ये उपवन हरियाली छाई है देखो खुशहाली आई है देखो खुलके उपजेंगे अन्न हमारे खुशहाल होंगे जीवन वो सारे बस एक विनती रख लेना प्यारे पेड़ लगाना तुम मिलकर सारे ब

धरती की पुकार

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03 -May-2017 Anju Goyal Save Trees Poems 0 Comments  2,528 Views
धरती की पुकार

तपती धरती लगा रही है मानव जाति से गुहार  पेड़ लगाकर मुझे बचाओ  अब तो सुन लो मेरी पुकार । न देखो मेरे जख्मो को न देखो मेरे दर्दो को  पर अपना हित तो देखो पर अपना भला तो देखो। बेदर्दी से काटकर पेड़ों को क्या अपनी प्यास

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