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सावन आया रे! सजनी

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28 -Jul-2021 Alok Pandey Season Poems 0 Comments  146 Views
सावन आया रे! सजनी

रिमझिम बारिश की फुहार,
ठण्डी-ठण्डी हवाओं की बयार।
हरे-भरे सब हुए बाग उपवन,
चिड़िया गाये राग मनोहार।
सावन आया रे !सजनी सावन आया।।

कभी-कभी घनघोर घटाओं का
खूब बरसना,
प्रकृत का धूल कर निखरना।
रमणीक होता है कुदरत का उपहार,
ऊपरवाला है सबसे बड़ा चित्रकार।।
सावन आया रे! सजनी सावन आया।।

खुशियों का हमें एहसास कराता,
इन्द्रधनुष सबके मन को भाता।
ताजगी का एहसास कराती है
रिमझिम फुहारें,
इस महीने आते खूब सारे त्योहार।
सावन आया रे! सजनी सावन आया।।

हरियाली तीज सुहागिनों के मन
को हर्षाता,
रक्षाबन्धन भाई-बहन के प्रेम को
अटूट बनाता।
चारों तरफ बूंदों के मोती बिखरे,
ओढ़ रखी है धरा ने अपने सर
पर चुनर धानी।
सावन आया रे! सजनी सावन आया।।

नाचे मयूर बादलों के संग,
कजरी गीत लगे मनभावन।
बागों में झूलों को देख याद
आये अपना बचपन,
ये सब हो गए किस्से-कहानी।
सावन आया रे! सजनी सावन आया।।

स्वरचित एवं मौलिक- आलोक पांडेय गरोठ वाले



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