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स्कूल बैग / School Bag

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19 -Jul-2018 सुमित.शीतल Student Poems 0 Comments  2,769 Views
सुमित.शीतल

देखो आज बच्चों के बस्ते कितने भारी है,
लादना पड़ता पीठ पर कितना ये भारी है।
देख लो सब कितना बड़ा हो रहा ये अन्याय है,
मासूम बच्चे पीस रहे भार तले कंहा हो रहा है न्याय है।
सच में कभी-कभी तो कंधे तक छील जाते है,
होता कभी दर्द इतना ये नन्हे सह नही पाते है।
बिल्कुल हिम्मत ये हार जाते,
पर बेबस है कुछ कर नही पाते।
चलो चल कर किसी दिन समझायेगे,
ये झूठी तसल्ली ही देते अभिभावक बेचारे।
बस अब तो कुछ ठोस काम करना पड़ेगा,
बस्तों का बोझ कम तभी होगा।
बदलनी पड़ेगी शिक्षा की ये कठिन नीति सारी,
जो पड़ रही है हमारे नन्हे-नन्हे बच्चो पर भारी।

सुमित.शीतल



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