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शुक्रिया

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01 -Apr-2020 Abbas Bohari Integration Poems 0 Comments  96 Views
Abbas Bohari

मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे गिरजाघर लगे ताले
पंडित मुल्ला पादरी सबके पड़े खाने के लाले

कण कण में बसे भगवान मूरख इंसा ढूंढे कहा
हो जिस दिलमें प्यार ओ परोपकार बसता वहां

आओ देखे इंसानी भेष में उसका अनोखा रूप
जो निभा रहे धर्म भूलकर भूख प्यास सर्दी धूप

चिकित्सक और दाई को मिला वरदान अनोखा
मौत से जूझते मरीज़ का खोलते जीवन झरोखा

पुलिस प्रशाशन का हर कर्मचारी तैनात चारो पहर
रखने आबाद ओ सुरक्षित हर गली मोहल्ला शहर

जल वायु भोजन के बिना होता रिक्त जीवन संसार
प्रजा के सेवक खोलकर बैठे किराना विक्रय भंडार

सभ्य समाज ने रखा निचले तबके में सफ़ाई कामगार
सम्भव नही स्वछता इनके बिना मच जाता हाहाकार

अधिकतर निवासी बैठे डरे सहमे दुबक कर अपने घर
दो पहिया वाहनों वाले करते वितरण लगाकर जैसे पर

हर देश को छूती ये आपदा अब कौन घुसेगा सीमा पार
फ़िर भी जान हथेली पर लिए खड़े जवान ना माने हार

बिजली पानी ईंधन जितनी भी जीवनावश्यक जरूरतें
उत्पादन में लगे अभियंता तकनीशियन है इन्हें महारतें

नई पीढ़ी की शिक्षा में करते अध्यापक जीवन अर्पित
आधुनिक तकनीक के सहारे जुटे करने ज्ञान समर्पित

धर्म देश के भेदभाव भुलाकर आ रहे स्वयंसेवक नज़र
परिवार वक़्त अक्ल दौलत के बलिदान का अनूठा मंज़र

सुनहरे शब्दों में इतिहास लिखेगा इनकी करनी का वाक़िया
सभी महान आत्माओं का अब्बास माने दिल से शुक्रिया



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