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Shikshak (GURU)

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05 -Sep-2016 Deepak Gandhi Teacher Day Poem 0 Comments  990 Views
Deepak Gandhi

गुरु होत संसार का लड्डू मोती चूर
कर देता अज्ञान को है मूढो से दूर।

ज्ञानपुंज वह रहा सनातन छल से कोसो दूर
कहते जिसको गुरु सब , दिल से है कोहनूर।

उजाला भरते जीवन में , शिक्षा दे भरपूर
नही देखते राजा रंक , नही देखते सूर।

शिष्यो के वो घर घर जाकर ,हेरे भूर भूर
चेले भी नादानी करकेँ ,भागे उनसे दूर।

दी आजादी चेलो को , किसको क्या मंजूर
कोई बन गया एस.पी .कलेक्टर ,कोई "मोदी"थरूर।

दिखता इकदम है नारियल सा, इकदम कड़क जरूर
लेकिन हृदय पूर्णमासी चाँद सा , है सफेद भरपूर।

हर डांट में "रत्न" वरसते , डंडा है कोहिनूर
जिसने जितने ज्यादा खाये ,उतना है मशहूर।

अपने जैसा एक बना दो यही तुम्हारा नूर
यही गुरु का पुरुस्कार है और गुरु दक्षिणा भरपूर।



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