Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Shikshakk

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05 -Sep-2016 Hanuman Prasad Bohra Teacher Day Poem 0 Comments  842 Views
Hanuman Prasad Bohra

इस युग पुरुष का कारवाँ सदा से चलता रहा
जो युगों की माँग को,शिक्षा से भरता रहा
यह कभी हारा नहीं,बाधाओं से लड़ता रहा
जिंदगी भर पर्वतों से सामना करता रहा |

मुस्कुराओ,बढ़ते जाओ,सबसे ही कहता रहा
आसमाँ बन कर धरा पर छाँव भी करता रहा
संकटों की धूप में नए फूल सा खिलता रहा
खुशबू बनकर जो हवा के साथ में फिरता रहा |

ज्ञान के प्रकाश हेतु दीप बन जलता रहा
जब अँधेरा छा गया तो रोशनी करता रहा
डूबने वालो को अपनी गोद में भरता रहा
जो नदी में नाव बन करके सदा तिरता रहा |

सच तो यह है सूर्य सा जो सदा चमकता रहा
सिर्फ शिक्षक है जगत में जो सदा जिन्दा रहा
वक़्त की तक़दीर अपने हाथ से लिखता रहा
जो अनेकों रूप में,हर कौम में मिलता रहा |



Dedicated to
To all teachers

Dedication Summary
On the occassion of teachers day.

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