Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

श्रमिक दिवस ......

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13 -Sep-2016 p.m. Social Events Poems 0 Comments  814 Views
p.m.

क्या? आज श्रमिक दिवस है?
तो क्या आज मुझे अवकाश है
या १ मई की और गहरी इस तपिस में,जब
मालिक अपने ए.सी. रूम से,
मुझे झाकने तक ना आए,
मुझे और पसीना बहाना है??
तब से सोच रहा हूँ आज की बात खास,,
दुविधा में हूँ सुबह से आज.....


हुजूर आप कहते हो मजदूर मुझे,
और मेरी मेहनत को पूजा.
क्या सच में कुछ बूँद,
है मेरा अस्तित्व ??
चाहे कुछ धुंधला धुंधला ही सा....
फिर क्यूँ दुत्कारा जाता हूँ मैं
बच्चो को दूर भगाते हो मुझसे
कि कहीं वो ना बन जाएँ मुझसे...
क्यूँ आज भी इतना अभागा सा हूँ?
सोंचकर ये नींदों के पीछे ,
कितनी ही रातें जागा हूँ मैं..
अपने लिए वक्त ही कहाँ,
जिसे आप कहते हो बास
यही सब सोंच सोंचकर
दुविधा में हूँ सुबह से आज.....



हाँ हाँ कल १० रू दिए थे जादा,
दूर से उतनी जैसे किलोमी. हो आधा..
एेसे भी पेट भर ही जाता,
जो हाँथ पर रख देते तो..
भरता तन क्या मन भी,
इस मजदूर का दिल भी भर आता..
अब सोंच रहा हूँ क्या इन्सान हूँ भी??
सो दुविधा में हूँ सुबह से आज.


अपना ही सब उठाते नहीं,
सिर पे उठाया दुनिया का भार
कभी आंसू कभी पसीना तो कभी,
खून की मैंने बहायी है धार...
तन से हूँ काला पर मन से नहीं
मिटा दो ना अब...
जीवन का सारा अन्धकार
तो मालिक...
यह दिवस मैं मनाऊँ कि ना?
बड़ी दुविधा में हूँ सुबह से आज
बड़ी दुविधा मे हूँ सुबह से आज.....


.........श्रमिक दिवस ......
@p.m.@



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