Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

सिसकता बचपन

0
विनोद सिन्हा-

" सिसकता बचपन "

भूख - गरीबी के चादर मे लिपटा हर पल रोता सिसकता बचपन...!!

भीख के कटोरे मे मजबूरी को भरकर ज़रूरत की प्यास बुझाता बचपन …!

कही जरूरत से ज्यादा मीलता तो कहीं झूठन से भूख मिटाता बचपन …!!

कहीं नर्म बिछोने पे सोता,सुंदर सपने
संजोता बचपन...!!!

कहीं बेचैनी के बिस्तर पे करवट बदलता
फूटपाथ पे सपनें सजाता बचपन …!

कहीं वॉटर पार्क,कहीं नर्म खिलौने मे हँसता खेलता खिलखिलाता बचपन...

कहीं मिट्टी के हीं खिलौने से हीं नन्हे से दिल को समझाता बचपन …!

कहीं पिज़्ज़ा,कहीं वर्गर, कहीं आइसक्रीम से खुश होता और चहकता बचपन ..,

कहीं रोटी के एक टूक्ड़े लिये ही रोता और तड़पता बचपन ..!

कहीं मंहगे गाड़ियों मे धुमता बचपन,कहीं पेड़ो के झूरमूठ नीचे सरकता बचपन...

हर पल हर छण ज़िंदगी की कीमत चुकाता बचपन ..!!!

अगर बचपन सिर्फ बचपन होता तो
फिर कितना प्यारा होता बचपन ?

विनोद सिन्हा-" सुदामा"



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017