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Kahani Dil Ki

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29 -Mar-2015 Dr. Parshuram Shukla Social Events Poems 0 Comments  777 Views
Dr. Parshuram Shukla

बच्चों ! जीवन तब तक चलता,
जब तक धड़कन रहती।
धक धक धक धक करती धड़कन,
एक कहानी कहती।।

इस शरीर के भीतर रहते,
दिल, दिमाग दो भाई।
एक दूसरे के साथी हैं,
करते नहीं लड़ाई।

क्या अच्छा है और बुरा क्या?
सब दिमाग बतलाता।
काम सोचने का करता है,
सब विषयों का ज्ञाता।।

इसके बल पर मानव अपनी,
सब पर धाक जमाता।
सबसे अच्छा बन धरती पर,
अपना ध्वज फहराता।।

पर दिमाग को प्यारे बच्चों,
ताजा खून चलाता।
और खून को बड़े जतन से,
दिल उस तक पहुँचाता।।

सोच विचार नहीं करता दिल,
ख्ूान पम्प यह करता।
काम सोचनेवाला, बच्चों,
बस दिमाग ही करता।।
लेकिन काम नहीं कर सकता,
खून अगर कम पाता।
खून अगर ज्यादा पहुँचे, तो
भी दिमाग फट जाता।।

लेकिन अधिक सोच कर मानव,
अपनी मौत बुलाता।
सोच विचार बहुत करता तो,
बिना मौत मर जाता।

बोझ एक सीमा के भीतर,
दिल अपना सह जाता।
दिल पर बढ़ता बोझ अधिक तो,
हार्टफेल हो जाता।।

बच्चों! दिल है बहुत कीमती,
आज इसे तुम जानो।
खेलो, कूदो, मौज मनाओ,
दिल को अपना मानो।।



Dedicated to
World Heart Day

Dedication Summary
World Heart Day 26 September

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