Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दहेज़ प्रथा एक श्राप !!

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07 -Mar-2019 Babulal Pareek Social Issues Poems 0 Comments  104 Views
दहेज़ प्रथा एक श्राप !!




धुम्रपान क्यों?

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21 -Feb-2019 सुमित.शीतल Social Issues Poems 0 Comments  180 Views
धुम्रपान क्यों?

कविता: धुम्रपान क्यों? पिता जी आप इतनी सिग्रेट रोज पीते है, नही जानते आप कि कितनी देती ये हानि। धुंआ-धुंआ भर पी लेने से क्या पाते हो मजा, जिंदगी है बहुत अनमोल, ना खुद को दो सजा। आप है सब जानते, पर फिर भी ना मानते, कितनी

पैसे बोलता है

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12 -Jan-2019 Narendra Social Issues Poems 0 Comments  103 Views
पैसे बोलता है

पहचानो पैसों की बोली क्यों के, पैसा बोलता है ना इसका कोई रंग है, लेकिन इसके आने से दुनिया का रंग बदलजाता है, ना इसका कोई रूप है, लेकिन कर किसीका यह स्वरूप है, ना इसकी कोई चाल है, फिर भी दुनिया इसी पर चलती है, ना इसकी कोई

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

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28 -Nov-2018 Anand kumar (Manish) Social Issues Poems 0 Comments  459 Views
कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है यहां जानवरों का चारा इंसान लूटता है देवताओं से ज्यादा यहां बाबा मिलता है बलात्कार का रोज यहां रिकॉर्ड टूटता है खुलेआम डिग्रीयां यहां बाजार में बिकता है कौन कहता है भारत में

कारावास1

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23 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  101 Views
कारावास1

गलत भावनाओ में बहकर कर चुका मज़ा एक गुनाहकी बरसो से भुगत रहा हूँ सज़ा मेरे वकीलने परिश्रम तो किए थे अथाह पर अदालतने पा ही ली सच की थाह अब ना किसीसे कोई शिक़वा ना गिला करनी की भरनी, किस्मत में जो मिला पर क्यो होता हमसे ज

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