Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

पैसे बोलता है

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12 -Jan-2019 Narendra Social Issues Poems 0 Comments  60 Views
पैसे बोलता है

पहचानो पैसों की बोली क्यों के, पैसा बोलता है ना इसका कोई रंग है, लेकिन इसके आने से दुनिया का रंग बदलजाता है, ना इसका कोई रूप है, लेकिन कर किसीका यह स्वरूप है, ना इसकी कोई चाल है, फिर भी दुनिया इसी पर चलती है, ना इसकी कोई

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

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28 -Nov-2018 Anand kumar (Manish) Social Issues Poems 0 Comments  412 Views
कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है यहां जानवरों का चारा इंसान लूटता है देवताओं से ज्यादा यहां बाबा मिलता है बलात्कार का रोज यहां रिकॉर्ड टूटता है खुलेआम डिग्रीयां यहां बाजार में बिकता है कौन कहता है भारत में

कारावास1

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23 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  68 Views
कारावास1

गलत भावनाओ में बहकर कर चुका मज़ा एक गुनाहकी बरसो से भुगत रहा हूँ सज़ा मेरे वकीलने परिश्रम तो किए थे अथाह पर अदालतने पा ही ली सच की थाह अब ना किसीसे कोई शिक़वा ना गिला करनी की भरनी, किस्मत में जो मिला पर क्यो होता हमसे ज

खोज़

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23 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  75 Views
खोज़

ईश्वर अल्लाह भगवन कितने तेरे नाम ढूंढू चारो धाम रघुपति राघव राजाराम मंदिर मस्जिद माथा टेका समझ तेरा घर गिरजाघर गुरुद्वारे लगाता रहा चक्कर कितना चढ़ाया प्रसाद दूधसे तक नहलाया मुल्ला पंडित पादरियोंको भी खूब खि

बलात्कार

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13 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  201 Views
बलात्कार

क़ुरान ने दिया हक़ औरत और मर्द है बराबर एकसे नुत्फ़ेसे हुए ख़ल्क नही औरत कमतर दोनोंके एकसे हुक़ूक़ अलग नही हुक्मे इलाही छुपाने हक़ कमज़र्फ़ मर्द ज़ाया करते स्याही औरत को दबाने सताने का ढूंढ लिया हथियार जो खोले ज़ुबान नामर

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