Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

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28 -Nov-2018 Anand kumar (Manish) Social Issues Poems 0 Comments  229 Views
कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है

कौन कहता है भारत में मेरा दम घुटता है यहां जानवरों का चारा इंसान लूटता है देवताओं से ज्यादा यहां बाबा मिलता है बलात्कार का रोज यहां रिकॉर्ड टूटता है खुलेआम डिग्रीयां यहां बाजार में बिकता है कौन कहता है भारत में

कारावास1

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23 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  17 Views
कारावास1

गलत भावनाओ में बहकर कर चुका मज़ा एक गुनाहकी बरसो से भुगत रहा हूँ सज़ा मेरे वकीलने परिश्रम तो किए थे अथाह पर अदालतने पा ही ली सच की थाह अब ना किसीसे कोई शिक़वा ना गिला करनी की भरनी, किस्मत में जो मिला पर क्यो होता हमसे ज

खोज़

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23 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  12 Views
खोज़

ईश्वर अल्लाह भगवन कितने तेरे नाम ढूंढू चारो धाम रघुपति राघव राजाराम मंदिर मस्जिद माथा टेका समझ तेरा घर गिरजाघर गुरुद्वारे लगाता रहा चक्कर कितना चढ़ाया प्रसाद दूधसे तक नहलाया मुल्ला पंडित पादरियोंको भी खूब खि

बलात्कार

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13 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  143 Views
बलात्कार

क़ुरान ने दिया हक़ औरत और मर्द है बराबर एकसे नुत्फ़ेसे हुए ख़ल्क नही औरत कमतर दोनोंके एकसे हुक़ूक़ अलग नही हुक्मे इलाही छुपाने हक़ कमज़र्फ़ मर्द ज़ाया करते स्याही औरत को दबाने सताने का ढूंढ लिया हथियार जो खोले ज़ुबान नामर

बढ़ते गुनाह

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11 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 1 Comments  219 Views
बढ़ते गुनाह

बढ़ते गुनाह क्यों बढ़ते जाते हैं गुनाह हर दिन जैसे चढ़ गए हो इंसानो पर जिन ख़ुले आम हो रहे कत्ले आम खौफ़मे जीते सारे सुबह शाम हैवानियत ने किया है परेशान गुनहगारोंके कैसे ढूंढे निशान काश सबको नसीब होती रोटी तन ढ़कने मिल

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