Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दहेज / Dahej

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02 -Oct-2019 Anil Mishra Prahari Social Issues Poems 1 Comments  177 Views
दहेज / Dahej

दहेज लूटता रहा। दहेज बेलगाम है प्रथा स्वच्छंद आम है, समाज को डुबो रहा कलुष असीम बो रहा। कुटुम्ब छूटता रहा दहेज लूटता रहा। माँग बेशुमार है मुद्रिका व हार है, गरीब बाप झुक गया कदम बढ़ाके रुक गया। स्वप्न टूटता रहा द

कलयुग के हकीम

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15 -Sep-2019 Vikash Varnval Social Issues Poems 0 Comments  188 Views
कलयुग के हकीम

अनावश्यक  जाँच मत लिख ऐ हकीम मत भूल हिसाब तेरा भी लिखा जाएगा खून पसीने मे सने होते हैं गरीब के नोट दिल पे हाथ रख, बता हजम कर पाएगा गिरवी रखेगा, पुश्तैनी अमानत बेच देगा बीमार है साहब बूरा वक़्त भी देख लेगा आवाज नहीं

Duties for depression patients

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14 -Jul-2019 Madhu Social Issues Poems 0 Comments  135 Views
Duties for depression patients

Duties for depression patients ममता भारद्वाज "मधु"द्वारा रचित कविता- मेरे मुल्क में जन-मानस के, अक्सर मिलते मेले हैं | कितने हिंदुस्तानी हैं! मेले में भी अकेले हैं | आस-पास रहने वालों में, ज़रा गौर से देखो तो | कोई तो ऐसा होगा- जो हंसना भू

मेरा मरना अभी Mera Marna Abhi

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31 -May-2019 Yashu Jaan Social Issues Poems 0 Comments  247 Views
मेरा मरना अभी Mera Marna Abhi

मेरा मरना अभी छोड़ दो मेरे भाईयों को लड़वाना , हिन्दू, मुस्लिम कहकर बरगलाना , मैं बीच में खड़ा हूँ बात मुझसे करो , मैं डरने वाली शह नहीं हुआ , जो तुम मुझे धमकियाँ दे रहे हो , मेरा मरना अभी तय नहीं हुआ सोचो जब हम उतरेंगे

डर लगता है

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15 -May-2019 Ritika Pandey Social Issues Poems 0 Comments  210 Views
डर लगता है

अब मुझे भी डर लगता है, अब मुझे भी घुटन होती है, अब मुझे भी चुभन होती है, अब मुझे भी जलन होती है, कैसे वो रोज़ दुपट्टा बाँध कर खुद को मेहफ़ूज़ समझती है, महज़ नज़रे झुका कर जाने को वो अपनी जीत समझती है, अनजान क़दमों की आहट सुनते

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