Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

फटी कमीज

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08 -Aug-2022 nil Social Issues Poems 0 Comments  27 Views
फटी कमीज

फटी कमीज फर्सत सिलने की कहाॅ,जिनकी फटी कमीज बधुआ मजदूरी उन्हें,सौपे रोज तमीज सौपे रोज तमीज, नहीं कुछ उनकी हस्ती बहता उनका खून,उडाते मालिक मस्ती भोग सकें आनन्द,नहीं जुड पाती जुर्रत मजदूरी जंजाल कहां मिल पाती फुर

तोमर छंद "अव्यवस्था"

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13 -Jul-2022 Naman Social Issues Poems 0 Comments  138 Views
तोमर छंद

हर नगर है बदहाल। अब जरा देख न भाल।। है व्यवस्था लाचार। दिख रही चुप सरकार।। वाहन खड़े हर ओर। चरते सड़क पर ढोर।। कुछ बची शर्म न लाज। हर तरफ जंगल राज।। मन मौज में कुछ लोग। हर चीज का उपयोग।। वे करें निज अनुसार। बन कर सभी प

कितनी लड़कियों के सपने छीन लेती हैं, कम उम्र में हुई उनकी शादियां

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03 -Apr-2022 Megha Raghuwanshi Social Issues Poems 0 Comments  195 Views
कितनी लड़कियों के सपने छीन लेती हैं, कम उम्र में हुई उनकी शादियां

कितनी लड़कियों के सपने छीन लेती हैं,कम उम्र में हुई उनकी शादियां। कितनी लड़कियों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं, कम उम्र में हुई उनकी शादियां। कितनी घुटन महसूस करती होगी वो लड़किया,जिनकी हो जाती होगी कम उम्र में शा

आधुनिक शिक्षा हुनर सिखाती हैं

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03 -Apr-2022 Raghvendra Pratap Singh Social Issues Poems 1 Comments  351 Views
आधुनिक शिक्षा हुनर सिखाती हैं

आधुनिक शिक्षा, हुनर सिखाती है मगर संस्कार कहां दे पाती है पढ़ लिख के युवा पैसे वाला बन जाता है मगर संस्कारों की कमी के कारण अपने मां बाप को भी भूल जाता है आधुनिकता की इस चकाचौंध में लोग पैसे को ही सबकुछ मान रहे मां-ब

Let them wear Hijab

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13 -Feb-2022 melodies and maladies Social Issues Poems 0 Comments  104 Views
Let them wear Hijab

अरे रहने दो उनका बुरखा, चाह से करे जब वो ,खुद का धोखा, सड़ने दो उन्हें ,तुम न लड़ो , न चीखो,उनके लिए, हम भी चाहते की वो बस दबे ही रहे , ये मुस्लिम महिलाएं बेचारी भारत में दुखी, उनकी बहनें अफगान में सुखी, वाह !तालिबान की सल

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