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Baal Suraksha

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29 -Mar-2015 Dr. Parshuram Shukla Social Issues Poems 0 Comments  1,124 Views
Dr. Parshuram Shukla

ईश्वर ने जग में मानव को,
सबसे अच्छा माना।
अपने जैसा उसे बना कर,
कहा धरा महकाना।।

एक नया वरदान समझकर,
माँ बच्चे को सेती।
बच्चे की मुस्कान हमेशा,
माता को सुख देती।।

दूध पिलाती, मालिश करती,
गीत सुना, नहलाती।
दिन भर करती प्यार, रात में,
अपने पास सुलाती।।

सपने मधुर देखती है वह,
बच्चे के जीवन के।
जैसे माली बाट जोहता,
खिलें फूल उपवन के।।

लेकिन वह तो खिलने के ही,
पहले मुरझा जाता।
भूख, गरीबी, लाचारी जब,
जोड़े उससे नाता।।

कूड़े कचरे में जाकर वह,
अपना बचपन पाता।
बीन थैलियाँ पाॅलीथिन की,
जीवन नर्क बनाता।।

पेट नहीं भरता इससे तो,
बाल श्रमिक बन जाता।
भारत का यह भाग्य विधाता,
बिना मौत मर जाता।।

भारत में यह क्यों होता है?
मुझे बताओ बाँके।
एक ओर चाँदी की चम्मच,
एक ओर ये फाँके।।

रह सकते हैं सुखी तभी जब,
सब बच्चे मुस्काएँ।
भेद बिना, ये बस्ता ले कर,
शाला पढ़ने जाएँ।।

ईश्वर की अनमोल भेंट को,
समझो और बचाओ।
बाल सुरक्षा करके अपना,
यह कर्तव्य निभाओ।।



Dedicated to
International Child Protection Day

Dedication Summary
International Child Protection Day (1 June)

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