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Jansankhya Vispot

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29 -Mar-2015 Dr. Parshuram Shukla Social Issues Poems 0 Comments  4,734 Views
Dr. Parshuram Shukla

बच्चों जनसंख्या क्या होती?
आज तुम्हें समझाते।
बच्चे, बूढ़े, युवा आदि जन,
सब इसमें आ जाते।।

धरती के सारे देशों में,
सभी जगह जन रहते।
कहीं गाँववाले कहलाते,
कहीं नगर का कहते।।

प्रेम भाव से मिल कर रहते,
काम सभी के आते।
सीमित जनसंख्या के कारण,
जीवन के सुख पाते।।

भोजन, पानी, शुद्ध हवा तक,
गाँवों में मिल जाती।
और परेशानी बिजली की,
कभी नहीं हो पाती।।

जन का सहयोगी बन कर जन,
मानव धर्म निभाता।
जन का जन से इस धरती पर,
ये ही सच्चा नाता।।

जनसंख्या सीमित रहती तो,
सारे जन सुख पाते।
हो विस्फोट अगर इसमें तो,
जन भूखों मर जाते।।

देश जहाँ जनसंख्या सीमित,
जीवन स्तर ऊँचा।
और अधिक जन संख्या हो तो,
सड़कें बनतीं कूँचा।।

जनसंख्या विस्फोट युध्द तक,
इस जग में करवाता।
एक पड़ोसी देश चीन का,
यह इतिहास बताता।।

मानव बन जाता है दानव,
जब हद से बढ़ जाता।
भूल भयानक करता है वह,
अपनी मौत बुलाता।।

सात अरब को पार कर कई,
है जग की आबादी।
इसको बढ़ने से अब रोको,
वरना है बरबादी।।

Jansankhya Vispot


Dedicated to
World Population Day (11 July)

Dedication Summary
World Population Day is an annual event, observed on July 11 every year, which seeks to raise awareness of global population issues. The event was established by the Governing Council of the United Nations Development Programme in 1989. It was inspired by the public interest in Five Billion Day on July 11, 1987 approximately the date on which the world's population reached five billion people.

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