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Mit Jayega Kissa Bhi

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23 -Feb-2015 ashutosh kamra Social Issues Poems 0 Comments  1,051 Views
ashutosh kamra

मिट जाएगा कि़स्सा भी .....

रिश्वत की प्रभुसत्ता भी ......
और विकास का सपना भी ......
हाथों हाथ कमीशन भी .....
गुणवत्ता का दावा भी .....
टेबल पर तय होता है.....
लेना भी और देना भी .....
इस सिस्टम में सबकी सोच ......
भर जाए घर मेरा भी .....
डरने की कोई बात नहीं ......
बिकाऊ वो ओहदा भी .....
चैक कटते ही मिल जाता है ......
सबको सबका हिस्सा भी .....
सड़क बनी और टूट गई है ......
टूटा राष्ट्र का सपना भी .....
बे दश्तो पा बेहयाओं को .....
मार गया है लकवा भी .....
वक्त को तू कमजोर न मान ....
मिट जाएगा किस्सा भी .....
आशुतोष कामरा बावफा



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