Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

ग़रीबी में गुजरता बचपन.....!!!

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19 -Oct-2018 pravin tiwari Social Poems 1 Comments  244 Views
ग़रीबी में गुजरता बचपन.....!!!

सुबह स्कूल के बस्ते की जगह । कांधे पर बोरा उठा लिया करता हूं ।। बच्चें ढूंढते जहां किताबो‌ में अपना भविष्य । वहीं मैं कूड़े में अपना नसीब खोज लिया करता हूं ।। बेशक तन पे लिबास है मेरे मैला । पर मन अपना मैं बेदाग लि

आज का समाज ......

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11 -Oct-2018 Piyush Raj Social Poems 0 Comments  279 Views
आज का समाज ......

"आज के समाज में जो हो रहा है उसी को बयां करने की कोशिश ..." उम्र लग जाती है शोहरत कमाने में वक़्त लगता नही इज्जत गवाने में पेट मे लात मारने वाले बहुत मिलेंगे जो भूखे को खिला दे बहुत कम है इस जमाने मे किसी को किसी की फिकर

औरत तूझे कैसे बचाऊ मैं

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21 -Sep-2018 Naren Kaushik Social Poems 0 Comments  245 Views
औरत तूझे कैसे बचाऊ मैं

अ औरत जात मैं अदना ब्राह्मण कैसे तूझे बचाऊ मैं आज बनके मेनका घुम रही हो फिर से कैसे दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती बनाए मैं तेरे उस रुप का कायल मैं जब खूद भूखा रह परिवार का पेट पाला था अपनी खुशियों से करके किनारे परिवा

Pal pal main....

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16 -May-2018 Devender Kãûšhîk Social Poems 0 Comments  352 Views
Pal pal main....

YE RANG YE ROOP SAB MEHEJ EK DIKHAVA HAI.... PAL PAL MAIN ROOP BADALTA HAI JESE AADMI EK CHALAVA HAI.... SUKH KI SABKO PADI HUYI HAI DUKH DEKAR AURO KO..... APNO KO APNA NAA SAMJHE SAMJHE APNA GAIRO KO.... TAN DHAK JATA, MANN UJAGAR KUCH AISA PEHNAVA HAI.... PAL PAL MAIN ROOP BADALTA HAI JESE AADMI EK CHALAWA HAI..... BEIMAANO KE GHAR BHARE HAI BHUKI HAI NEEV IMANDARI KI... INSAA AB INSAA NA RAHE NASAL BIGAD GAYI DUNIYADARI KI.... MAA BAAP KE LIYE ANN NAHI BHAGWAN KE LIYE CHADAWA HAI.... PAL PAL MAIN ROOP BADALTA HAI JESE AADMI EK CHALAVA HAI..

आजकल का ये समय भटका हुआ है मूल से

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07 -May-2018 Madan Saxena Social Poems 0 Comments  221 Views
आजकल का ये समय भटका हुआ है मूल से




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