Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

स्त्री "एक लाचार की आत्मकथा"

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17 -Apr-2022 Musayar Social Poems 0 Comments  21 Views
स्त्री

भूख थी न प्यास थी उसके तन पे, चोट के निसान थे उसके बदन पर। ममता उसके ललाट पर चमक रही थी, घुट-घुट के बो बेचारी मर रही थी।। न है कोई परवाह थी आज उसको, ठान ले बही करना था आज उसको। है खुद रही भूखी थी वो बेचारी, दिख रही थी साफ

दिलें खुशी भी अजब होती है।

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15 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Social Poems 0 Comments  77 Views
दिलें खुशी भी अजब होती है।

दिले खुशी भी अजब होती है। आने पर इन पलकों को भिगा देती हैं।।1।। ये मजबूरी भी गज़ब होती हैं। सच्चे इंसान को भी झूठा बना देती हैं।।2।। बीती जिदंगी भी सबक होती है। सीखना चाहो तो बहुत सीखा देती है।।3।। हालात ए बयां नज़

कहां ऐसी नज़र होती है।

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15 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Social Poems 0 Comments  36 Views
कहां ऐसी नज़र होती है।

यूं हुनर को पहचानें ले सभी में कहां ऐसी नज़र होती है। हीरी को जानने की खातिर जौहरी की जरूरत होती है।।1।। यूं तो हर सभी सच्चे आशिकों में रुह ए मोहब्ब्त होती है। गर चोट लगे किसी एक को तो दूसरे पर असर होती है।।2।। जब दव

मोहब्बत को कौन समझा है।

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15 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Social Poems 0 Comments  38 Views
मोहब्बत को कौन समझा है।

मोहब्बत को कौन समझा है हमको मिलाओ उससे। हमारे मिलने वालों में तो कोई भी ना समझा हैं इसे।।1।। यूं आलिमों को इश्क ने बना दिया काफिरों के जैसे। ना जानें कितने आशिक़ बन गए किताबों के हिस्से।।2।। अल्फाजो से मत समझना य

मोहब्बत का फलसफा अजीब होता है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Social Poems 0 Comments  41 Views
मोहब्बत का फलसफा अजीब होता है।

मोहब्बत का फलसफा भी अजीब होता है। ताउम्र पहला ईश्क दिल के करीब रहता है।। जिससे करो मुहब्बत वही रफीक होता है। चाहने वाला ही अक्सर खुद रकीब होता है।। उसके चेहरे पर नूर ही नूर नज़र आता है। अच्छी सूरत वाला दूर से ही द

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