Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

किन्नर का समाज में स्थान

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14 -Mar-2019 mannu bhai Social Poems 0 Comments  183 Views
किन्नर का समाज में स्थान

किन्नर का समाज में स्थान ना नर है ना नारी है, ना ही समाज के अंश है ना घर है ना परिवार है, ना ही इनका कोई वंश है बुझे हुए यह दीपक है, जौ जलते दीप हजारो में औकात नही है इनकी, इस जग के बाजारो मेँ कर्म है इनका दुआ देना,और बलाओ

बदल रहा जमाना है......

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12 -Jan-2019 Piyush Raj Social Poems 0 Comments  301 Views
बदल रहा जमाना है......

बदल रहा जमाना है....... रिश्तेदार ऑनलाईन हो गए जिंदगी में सब फाइन हो गए मिलते नही आपस में अब तो व्हाट्सएप पर सब जॉइन हो गए मतलबी हो गए है रिश्ते नही इसे अब निभाना है क्या करोगे भैया अब तो बदल रहा जमाना है किताबों से सब द

ग़रीबी में गुजरता बचपन.....!!!

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19 -Oct-2018 pravin tiwari Social Poems 1 Comments  403 Views
ग़रीबी में गुजरता बचपन.....!!!

सुबह स्कूल के बस्ते की जगह । कांधे पर बोरा उठा लिया करता हूं ।। बच्चें ढूंढते जहां किताबो‌ में अपना भविष्य । वहीं मैं कूड़े में अपना नसीब खोज लिया करता हूं ।। बेशक तन पे लिबास है मेरे मैला । पर मन अपना मैं बेदाग लि

आज का समाज ......

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11 -Oct-2018 Piyush Raj Social Poems 0 Comments  524 Views
आज का समाज ......

"आज के समाज में जो हो रहा है उसी को बयां करने की कोशिश ..." उम्र लग जाती है शोहरत कमाने में वक़्त लगता नही इज्जत गवाने में पेट मे लात मारने वाले बहुत मिलेंगे जो भूखे को खिला दे बहुत कम है इस जमाने मे किसी को किसी की फिकर

औरत तूझे कैसे बचाऊ मैं

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21 -Sep-2018 Naren Kaushik Social Poems 0 Comments  369 Views
औरत तूझे कैसे बचाऊ मैं

अ औरत जात मैं अदना ब्राह्मण कैसे तूझे बचाऊ मैं आज बनके मेनका घुम रही हो फिर से कैसे दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती बनाए मैं तेरे उस रुप का कायल मैं जब खूद भूखा रह परिवार का पेट पाला था अपनी खुशियों से करके किनारे परिवा

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