Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

पहचान हमारी हिंदी

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13 -Sep-2020 Mamta Rani Social Poems 0 Comments  29 Views
पहचान हमारी हिंदी

पहचान हमारी हिंदी है जन-जन का इससे सरोकार पहचान हमारी हिंदी है जिसपे सबको नाज है हिंदी भारत माँ की बिंदी है भारत ऐसा देश हमारा हम सबका यह प्यारा है मातृभाषा है हिंदी हमारी जन-जन की यह भाषा है हिन्दी से है हिन्दुस्

इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

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29 -Aug-2020 SAI Love Akash Gupta Social Poems 0 Comments  516 Views
इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

ऐ इंसान, तुझे पता है, क्या है यह शान? यह एक माया है जहां तुझे अपनी खुशियां त्याग कर करने होते हैं, सब काम। तो क्या तुझे चाहिए ऐसे ही शान? ऐ इंसान, क्यों है तुझे इस संसार में प्यार अपनी इस झूठी शान पर, कहां ले जाना है, तुझ

आत्मनिर्भरता 2

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24 -Jun-2020 jagmohan jetha Social Poems 0 Comments  681 Views
आत्मनिर्भरता 2

" *आत्मनिर्भरता 2*" आजकल शादियों में *टॉप 50* का फॉर्मूला गजब ढहा रहा है! तथाकथित अपनों को आत्मचिंतन कर "आत्मनिर्भर" बना रहा है! ना किसी को कोई शिकवा हैं और ना ही कोई शिकायत कर पा रहा है यजमान खुद मेहमान बन आनंद उठा रहा है

विकास हो रहा है

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07 -Jun-2020 Harpreet Ambalvee Social Poems 0 Comments  944 Views
विकास हो रहा है

विकास हो रहा है हर तरफ दंगे फसाद मासूमों की चीखे, हर तरफ हाहाकार, हर कोई अपना रोना रो रहा है, मुख्य सेवक कहते हैं विकास हो रहा है आम जरूरतों की चीजों के दाम महंगाई को छू रहे हैं, सरकार आम जनता पर टैक्स लगा लगा कर उनका

उम्मीदे

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25 -May-2020 Kamlesh Dalavadi Social Poems 0 Comments  171 Views
उम्मीदे

गुजर रही रात तो सुबह होनी है कल सूरज निकलने की उम्मीद जगाई है कही पर तो रस्ते नज़र नहीं आएंगे पर बुलंद हौसला लेके ही सफर कटनी है चन्द धड़ी मायूस करे क्यों तुजे यहाँ? जिंदगी को हर मुस्कुराके तो जिनि है दिल में आग और आँ

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