Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैंने प्रवाह करनी छोड़ दी है

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11 -Oct-2021 Harpreet Ambalvee Social Poems 0 Comments  45 Views
मैंने प्रवाह करनी छोड़ दी है

मैंने प्रवाह करनी छोड़ दी है, सीये थे होंठ जो मेरे शर्म से, रिश्ते को बचाने के लिए, रोते हुए दिल की चीख़ो से, वो शर्म की गांठे खोल दी है, मैंने परवाह करनी छोड़ दी है, घुटता रहा सहमता रहा, जिनके लिए सालों साल, कहीं कोई जव

काम चाहिए काम चाहिए

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20 -Aug-2021 AKHILESH ghritlahare Social Poems 0 Comments  165 Views
काम चाहिए काम चाहिए

काम चाहिए काम चाहिए काम चाहिए आज हर किसी को बस एक काम चाहिए बीत गया वह समय भैया जब दो पल चैन की सांस लेते थे दुख दुविधा दूर करके आराम से हम सोते थे काम चाहिए काम चाहिए काम चाहिए मां-बाप को देखना है शादी करनी है तो काम

मम्मी हम सबकी दुनिया

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21 -Jul-2021 nil Social Poems 0 Comments  132 Views
मम्मी हम सबकी दुनिया

मम्मी हम सबकी दुनिया मम्मी अच्छी ,पापा अच्छे /दादी अच्छी ,दादा अच्छे सबसे अच्छे ,हम सब बच्चे /भोले भाले ,मन के सच्चे सु न सुन मम्मी जब मुस्काई /हम सबकी मति तब चकराई हम सबने इतिहास खगाला/मन ने तब यह प्रश्न उछाला मम्मी

सरकार

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11 -May-2021 prerrit tyagi Social Poems 0 Comments  116 Views
सरकार

मोह उतना हो जितना पचा सको सिंहासन से इतना मोह क्यों है ? सरकार हो तो सरकार ही रहो हर बात में टोह क्यों है ? जो कर दिया है उसका ब्याज भरो यह लूट-पाट क्यों है ? लोभ उतना हो जितना छिपा सको मीठी वाणी विषाक्त क्यों है ? मिट्ट

दुनिया से समझौता मत कर....

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04 -May-2021 Praveen Dhakar Social Poems 0 Comments  244 Views
दुनिया से समझौता मत कर....

दुनिया से समझौता मत कर... दुनिया से समझौता किया तो खुद को ही तू खो देगा, हंसते ~हंसते अचानक यूं ही तू रो देगा। कुछ वक्त के बाद बस अफसोस ही तेरे साथ होगा, ज़िन्दगी जीने के लिए ऐसा कुछ भी ना खास होगा। समझौता करने से पहले

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