Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

!!अमात्य शान है!!

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16 -Jan-2021 Parmanand kumar Social Poems 0 Comments  186 Views
!!अमात्य शान है!!

------------------------- ।।अमात्य शान है।। ------------------------- 14.03.2020 हम अमात्यपुत्र ,प्रबुद्ध, शुद्ध प्रखर, तेजस्वी ,प्रजाति हैं ! चाणक्य वंश ,दशरथ संग राजघरानों के ,सलाहकार हैं ! हम अमात्य हैं ,हम अमात्य हैं भारत की ,ये शान है! स्वर्णिम रहा ,इ

तवायफ़ हूँ

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31 -Dec-2020 Divya Raj kumar Social Poems 0 Comments  246 Views
तवायफ़ हूँ

हाँ मैं तुम जैसी नहीं अपनी अस्मत मैं खुद ही निलाम करती हूँ खुद को बदनाम मैं सरेआम करती हूँ पर आते तो तुम ही हो जब मैं जिस्मफ़रोशी का धंधा खुलेआम करती हूँ रूह चिखती है मेरी घुटन से पर हर रोज दुल्हन सी सजती सवरती हूँ म

पहचान हमारी हिंदी

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13 -Sep-2020 Mamta Rani Social Poems 0 Comments  149 Views
पहचान हमारी हिंदी

पहचान हमारी हिंदी है जन-जन का इससे सरोकार पहचान हमारी हिंदी है जिसपे सबको नाज है हिंदी भारत माँ की बिंदी है भारत ऐसा देश हमारा हम सबका यह प्यारा है मातृभाषा है हिंदी हमारी जन-जन की यह भाषा है हिन्दी से है हिन्दुस्

इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

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29 -Aug-2020 SAI Love Akash Gupta Social Poems 0 Comments  742 Views
इंसान: सच्ची खुशियां या झूठी शान

ऐ इंसान, तुझे पता है, क्या है यह शान? यह एक माया है जहां तुझे अपनी खुशियां त्याग कर करने होते हैं, सब काम। तो क्या तुझे चाहिए ऐसे ही शान? ऐ इंसान, क्यों है तुझे इस संसार में प्यार अपनी इस झूठी शान पर, कहां ले जाना है, तुझ

आत्मनिर्भरता 2

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24 -Jun-2020 jagmohan jetha Social Poems 0 Comments  838 Views
आत्मनिर्भरता 2

" *आत्मनिर्भरता 2*" आजकल शादियों में *टॉप 50* का फॉर्मूला गजब ढहा रहा है! तथाकथित अपनों को आत्मचिंतन कर "आत्मनिर्भर" बना रहा है! ना किसी को कोई शिकवा हैं और ना ही कोई शिकायत कर पा रहा है यजमान खुद मेहमान बन आनंद उठा रहा है

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