Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

आज घुट के इंसान यहां जीते हैं.....!!

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14 -Nov-2019 pravin tiwari Social Poems 0 Comments  480 Views
आज घुट के इंसान यहां जीते हैं.....!!

सुबह घर से निकले तो, शाम को घर आते हैं.....! घर की खुशीयों के लिए, इंसान क्या कुछ नहीं करते है......! बढ़ती इस मंहगाई की दौर में, बस मिडिल क्लास ही पिसते है.....! कैसे बच्चों का भविष्य बनाएं, स्कूल काॅलेज भी कहां सस्ते हैं......! जै

वह गरीब है

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09 -Nov-2019 Divya Raj kumar Social Poems 1 Comments  732 Views
वह गरीब है

पिछ्ले कुछ दिनों से या यूँ कहूँ हमेशा से दुख होता है देखकर रोना आता है पर आसूँ कैसे बहाऊ जब वो खुश है जैसी भी हालत है उसकी उसमे वो खुश है तेज धूप में चमड़ी झुलसती है उसकी पैरों में छाले पड़ जाते है क्योंकि वह गरीब है

किसानों का सम्मान हो...

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20 -Sep-2019 Suman Kumari Social Poems 0 Comments  453 Views
किसानों का सम्मान हो...

किसानों का सम्मान हो.... पंथरिली बंजर जमीन को, जिसने हरे भरे खेतों में ढाला... अपना ही नहीं पूरे भारत का, पेट जिन कृषकों ने पाला है, अब जरुरत है उनका भी गुणगान हो.... किसानों का सम्मान हो....!!!! जो मिट्टी को चीरकर उससे अनाज उ

मैंने नेत्र दान कर दिया

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24 -Aug-2019 Vikash Varnval Social Poems 0 Comments  812 Views
मैंने नेत्र दान कर दिया

किसी अँधेरे को उजाले का वर दिया हां, मैंने नेत्र दान कर दिया किसी और की अमानत हो गई ये आँखें सोये सपनों में जान भर दिया हां, मैंने नेत्र दान कर दिया मेरा धर्म है सम्हाल के रखूं अमानत को सलामती का इंतज़ाम कर दिया हां,

इंसानियत में ही सबका भला है......!!!

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20 -Apr-2019 Shivendra Singh Social Poems 0 Comments  656 Views
इंसानियत में ही सबका भला है......!!!

कई दिनों की जुदाई थी, जब हमने घर में अंतिम गरम रोटी खाई थी | जीवन कैद सांसों में था, जीने का मलाल एहसासों में था | ह्रदय की तेज धड़कनों के बीच , देश में कुछ गूंज रहा था | किसी को राजनीति , तो किसी को दंगा सूझ रहा था | मै अचं

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