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Badlaav

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20 -Sep-2013 PALLAV JEE Social Poems 1 Comments  4,336 Views
PALLAV JEE

स्तब्ध हूँ मैं
अपने आस-पास की दुनिया को
रंग बदलता देखकर
दिल का सँजोया हर ख्वाब
जैसे टूटकर बिखरता सा लगता है
कोमल भावनाओं का ताना-बना भी
दरकता सा दिखता है
कैसी हो गयी है दुनिया ?
कितने बदल गए हैं लोग ?
मैं तो मनोभाव भी नहीं बदल पता
और लोग तो अपनी केचुली भी
बड़ी सहजता से बदल लेते हैं
रिश्तों की बुनियाद का रस भी
सूख सा गया है
जिन कंधों का सहारा
लिया करते थे कभी
उन कंधों पर पता नहीं क्यूँ
कांटे से उग आए हैं
कदाचित !
मैं ही गलत हूँ
दुनिया तो अपनी रौ मे
ठीक-ठाक चली जा रही है.....



Dedicated to
MY BHAIYA

Dedication Summary
मेरे भैया स्वभाववश अत्यंत सरल है,उनकी हार्दिक निश्छलता को बहुधा ही कुछ स्वजनों ने पीड़ित किया है. परंतु चन्दन सरीखी अपनी निर्मलता को वो फिर भी अक्षुण्ण ही रखते है. अपनी इस रचना से मैंने उनके इ

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1 More responses

  • shraddha the poetess
    Shraddha the poetess (Registered Member)
    Commented on 26-September-2013

    bahot achhi rachna......
    mai apko apni rachnayein padne v unpr apna drishtikon spasht krne k liye bhi nimantrit karna chahoongi.........

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