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Gaadi Ka Pahiya

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01 -Mar-2015 Dr. DINESH KUMAR KOLI Social Poems 10 Comments  3,627 Views
Dr. DINESH KUMAR KOLI

पहिये की रफ्तार समझ,
जरा धीरे चल, मेरे भइ्या
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

पहिये पर तेरा अाना है,
पहिये पर, तेरा जाना
पहिये की रफ्तार से
दौढ़ रहा है, सारा जमाना
पहिया मुड़-मुड़ कहे...
मोड़ पर, सँभल जा राजा भइ्या
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

लंबी दूर तुझे जाना है,
सबको सुरक्षित पहुँचाना
हाॅर्न, ब्रैक, क्लॅच, एक्सीलरेटर
सामंजस्य बिठाना
कहीं सड़क टूटी-फूटी...
कहीं गड्ढे, तो कहीं खइ्या
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

भागम-भाग मची दुनिया में,
भाग रहे सब, बच-के निकल-के
स्टीयरिंग पर जब हाथ तेरा़,
तब चलना, सँभल-सँभल के
घर पर तेरी राह तक रहे...
बीबी, बच्चे, बूढ़ी मइ्या
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

कहीं पर ट्रैफिक-जाम,
कहीं पर, सिगनल लाल या पीला
सिगनल ग्रीन का इंतजार,
कर-ले चश्मा ढीला
सिगनल क्राॅस नहीं करना...
पकड़ेगा तुझे सिपहिया
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

पहिये पर तू चल रहा
संग में चल रहा, घड़ी का पहिया
अपनी सुध-बुध खोकर,
तू करता है, रुपैया-रुपैया
किसने देखा कौन घड़ी में...
थम जाय़ेगा, समय का पहिया
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

पहिया दुनिया का विकास,
पहिये की महिमा भारी
यंत्र, तंत्र, संयंत्र चल रहे,
पहिये की दमदारी
पहिया है एक चक्र-सुदर्शन
जिसके प्रभु, श्रीकृष्ण-कन्हैया
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।

पहिये की रफ्तार समझ,
जरा धीरे चल मेरे भइ्या
पहिया बड़ा है, भइ्या,
तेरी चली-रे नइ्या।


दिनेश कुमार कोली
भोपाल, मध्यप्रदेश

Gaadi Ka Pahiya


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10 More responses

  • poemocean logo
    SHARAD SALUNKE (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    Great work sir,
    Keep it up.

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    SUSMITA SAHA (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    zindagi ek chalaman gaddi, safar ko enjoy karo to yatra sukhad hoga, nahi to ek pahad banega jo aap charne ki kashish karogi aur phisalte jaogi..

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    Rajesh Sen (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    Wo sochte h ki Ghr mera jalake kush rahenge
    Hawa chalegi to raakh unki aankho me hi hogi......

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    G.s.wilson (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    very nice sir.

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    Chandrashekhar gurjar (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    Lajbab sir.ek phiye me puri zindgi ka chitran..

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    Mayank gurjar (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    super se bhi upar sir....
    really koli sir.. aap observation ke baap.....

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    AYUSH SHARMA (Guest)
    Commented on 05-March-2015

    sir i liked your poem very much because it is based on the 'TRUTH' of a common persons' life..

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    Faisal (Guest)
    Commented on 04-March-2015

    good literature work rlated to life.

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    Shree krishn choudhary (Guest)
    Commented on 04-March-2015

    very nice sir.

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    Lalaram gohar (Guest)
    Commented on 04-March-2015

    bahut badiya koli ji aapki kavita prerna spard hai.

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