Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

कैसे तुलसी वाल्मीक ऋषि रामायण रच पाएंगे

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16 -Feb-2021 bharat Spiritual Poems 0 Comments  113 Views
कैसे तुलसी वाल्मीक ऋषि रामायण रच पाएंगे

ख़ुद ही खुद से प्यार करेंगे प्यार नहीं दे पाएंगे... स्वार्थ भरे दुनिया के सांचे, सब उसमें ढल जाएंगे... अपना ही सुख अपना ही हित, बैठ गया उर अन्तर में, रघुकुल जैसा नेह और उत्सर्ग कहां से लाएंगे... काव्य लेखनी कुंठित होगी,

कुंती ----कर्ण संवाद

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20 -Jan-2021 Parmanand kumar Spiritual Poems 0 Comments  149 Views
कुंती ----कर्ण संवाद

कुन्ती और कर्ण संवाद """"""""""""""""""""" By Parmanand kumar. कुंती:___ सुन कर्ण तू कर्ण नहीं मेरा सुत ,तुम कौन्तेय हो ! पांडवों से भी ज्येष्ठ तुम्ही हो रे अभागे, मैं ही तेरी जननी हूँ ! राजगद्दी भी तुम्हें मिलेंगी युधिष्ठिर का तुम अग्रज़ हो !

आशा की किरण फैलाते रहो.

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30 -Jul-2020 Dev Maurya Spiritual Poems 0 Comments  463 Views
आशा की किरण फैलाते रहो.

आशा की किरण फैलाते रहो, इस जग में सदा जगमगाते रहो!! हौसले हो बुलंद- बुलंद फैसले हो अडिग यूहीं आगे कदम तुम बढ़ाते रहो!! डर और भय से न हो कोई नाता तुम्हारा, सच्चाई की राह पे आगे बढ़ते रहो !! आशा की किरण फैलाते रहो इस जग में

छिप नही सकते तुम / chhip nahi sakte tum kahi

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23 -May-2020 shalu L. Spiritual Poems 0 Comments  698 Views
छिप नही सकते तुम / chhip nahi sakte tum kahi

छिप नही सकते तुम कही सृष्टी के रचयिता छवि तुम्हारी हर कही है क़ुदरत की क्यारी में रहमतो की बारी में फूलों के खिलने में बारीश के बरसने में मौसम के बदलने में धरती के उगम में बादलो के गगन में ख़िलखिलाते आंगन में ध्वनि

तुम हो, तुम हो, तुम हो

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02 -Dec-2019 Jyoti Ashukrishna Spiritual Poems 0 Comments  659 Views
तुम हो, तुम हो, तुम हो

दूर तक फैली इस तन्हाई में जब कोई आहट आती है तो लगता है कि तुम हो, तुम हो, तुम हो जब अरुण की किरणें निशा की कालिमा को बेधकर ऊषा को मुक्त कराती हैं तो लगता है कि तुम हो, तुम हो, तुम हो जब तपती धरती पर पड़ सावन की बूँदें तन म

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