Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

जन्नत की चाभी तुम्हारे पास है।

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27 -Jan-2022 ताज मोहम्मद Spiritual Poems 0 Comments  2 Views
जन्नत की चाभी तुम्हारे पास है।

सुना है ज़न्नत की चाभी तुम्हारे पास है। क्या ले चलोगे हमें भी अपने साथ हमतो यूँ भी तुम्हारे खास है।।1।। अहसान मानेंगें तुम्हारा हम तमाम उम्र। अगर दिखाओगे प्यारा नज़ारा हमको जो फिरदौस ए खास है।।2।। यूँ तो नेकी बदी क

मैं आया तो ये जहां पाया

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12 -Aug-2021 Swami Ganganiya Spiritual Poems 0 Comments  85 Views
मैं आया तो ये जहां पाया

मैं आया तो ये जहां पाया खुद को मैं फिर भी ना समझ पाया मैं मे था मैं ये भी ना जाना मैंने ये दुनिया कल्पना ही तो थी मेरी जिसे इन्सान आज तक ना समझ पाया जब समझ आया खुदा को पाया मैं कही ना पाया तो फिर मैं कौन था ये मैं आज तक

रूपमाला छंद "राम-महिमा"

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07 -Jul-2021 Naman Spiritual Poems 0 Comments  430 Views
रूपमाला छंद

रूपमाला छंद राम की महिमा निराली, राख मन में ठान। अन्य रस का स्वाद फीका, भक्ति रस की खान। जागती यदि भक्ति मन में, कृपा बरसी जान। नाम साँचो राम को है, लो हृदय में मान।। राम को भज मन निरन्तर, भक्ति मन में राख। इष्ट पे रख

The Essential Reality

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12 -Jun-2021 Mohammad Younus Koul Spiritual Poems 0 Comments  191 Views
The Essential Reality

When you see the essential reality of things... ...you could get peace, tranquility, ecstasy, enlightenment and awarenes; All your fears will leave you, and hope shall fill you; Reality is to be felt and perceived... ...it is not to be assumed and speculated; Because many an imagination is false and unfounded; It could even fill you with thoughts shitty ... ...superstition, wishful thinking, or even a dangerous fantasy; Reality never appears in 3D forms; All forms are products of imagination... ...those you find in dreams, in temples and church

मनविश्राम छंद "माखन लीला"

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14 -May-2021 Naman Spiritual Poems 0 Comments  634 Views
मनविश्राम छंद

मनविश्राम छंद "माखन लीला" माखन श्याम चुरा नित ही, कछु खावत कछु लिपटावै। ग्वाल सखा सह धूम करे, यमुना तट गउन चरावै।। फोड़त माखन की मटकी, सब गोरस नित बिखराये। गोपिन भी लख हर्षित हैं, पर रोष बयन दिखलाये।। मात यशोमत नित्

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