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Meri Kalam

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07 -Sep-2015 LALJEE THAKUR(Haffman) Student Poems 1 Comments  5,794 Views
LALJEE THAKUR(Haffman)

मेरी कलम

मैं तेरे बिन कुछ भी नहीं,बस जानवर था।
खाना फिर सोना हमेशा यही तो करता था।

कैसे पकरू क्यों पकरू तुझे,
बस डर के मारे घस दिया करता था।

यूँ ही घसते ,रगड़ते मैं पकड़ना सिख लिया,
किसकी मजाल जो अब दूर करे,
मैं शब्द को सजाना जो सिख लिया।

मैं कही निकलता तो तुझे साथ लिए,
अकेला पड़ जाऊ मैं अगर कभी ,
तो कोरे कागज़ पर लिख दिया करता था।
याद है मुझे, तेरे खोने के बाद ,
मैं आँसू का बूँद छलका दिया करता था।

मैं तुझे माँ कहूँ या दिलरुबा कहूँ,
तूने तो दोनों का फ़र्ज़ अदा किया है।
घुटन सी महसूस किया है इस दुनिया में,
झूठा चेहरा बस दिखा है मुझे ,
जिस जिस ने हमसे वादा किया है।

मर जाऊ अगर कभी तो फूलों का माला नहीं,
बस कलमों का माला भेंट देना,
जबतक चलती रहे ये कलम करते रहना प्यार,
बिछुड़ जाय कभी तुम से हो भला ,पर मरने मत देना।

लालजी ठाकुर।

Meri Kalam


Dedicated to
all of you

Dedication Summary
मुझे कलम का महत्व नहीं भूलना चाहिए,क्योंकि इसिने जिन सिखाया है हमे।।।।

आपकी टिप्पणी मेरे लिए अनमोल और बहुमूलय है ।आपको ये पोस्ट पसंद आई तो भी ना आई तो भी,अपनी कीमती राय कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.आपके मशवरों से मुझे बेहतर से बेहतर लिखने का हौंसला मिलता है.

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1 More responses

  • poemocean logo
    Subhash jee (Guest)
    Commented on 12-September-2015

    Bahut sundar kavita likhi hai kalam par aapne .kalam vastav me hamare liye bahut kaam ki hai..

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