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सौभाग्य मेरा मैं हार रहा हूँ

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05 -Sep-2021 rtripathi Hard Work Poems 0 Comments  157 Views
rtripathi

"सौभाग्य मेरा मैं हार रहा हूँ''


मैं हारू सौभाग्य मेरा
मैं जीतू कर्मान्त मेरा
पर रुकना न है
इस जीवन पथ पर
बढ़ना गिरना फिर उठना
यह ही है जीवन का दृश्य अनूप ---

ये राहें है अपना यथार्थ बतला रही
आने जाने वालों की बीती बातें बातला रही
कौन रुका इतिहास बना
उनका तो लेखा-जोखा है
पर कितने आये चले गये
बाते न उनकी याद रही
पर क्या सीखू इनसे मैं
हठ करके जो बैठा हूँ
मुझको है मेरी राह पता
है चाह पता फिर भी मैं भटक रहा हूँ
सौभाग्य मेरा मैं हार हूँ।।
ऋषभ त्रिपाठी



Dedicated to
rtsln101@gmail.com

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