Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

स्वामी विवेकानंद

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विकास त्रिवेदी 'प्रलय'

१२ जनवरी १८६३ में उस महासूर्य का उदय हुआ,
उस कांतिमान बालक को पाकर हर्षित सबका ह्रदय हुआ,
ओज भरी वाणी थी जिनकी नरेंद्र दत्त था नाम,
प्रचार सनातन धर्म का करते थे अविराम,
विश्वनाथ जी पिता और भुवनेश्वरी देवी माता थी,
कलकत्ता की पावन वसुधा उनकी भाग्य विधाता थी,
परमहंस के योग्य शिष्य थे वेद पुराणों के ज्ञाता,
धर्म और दर्शन से उनका रहा बहुत गहरा नाता,
दिया शिकागो भाषण ऐसा सभी फिरंगी झूम गए,
विश्वगुरु भारत को माना उनके चरणों को चूम गए,
मैकाले के प्रबल विरोधी विधिवत हिंदी भाषी थे,
२२ भाषाओँ के ज्ञाता वे निज में मथुरा काशी थे,
बृह्मचर्य जीवन था उनका कर्मयोग निर्माता थे,
श्रुतिधरा कहे जाते थे धर्म सनातन त्राता थे ,
खेतड़ी के राजा अजित ने ही विवेक था नाम दिया,
बन विवेक स्वामी जी ने युवकों को नव आयाम दिया,
स्वामी जी ने ही वास्तव में तरुणाई का अर्थ बताया है,
होती क्या है युवा शक्ति सबको ये बोध कराया है,
शत बार नमन भारत भू को जहाँ विवेकानंद हुए,
नवयुवकों के आदर्श बने भारत के स्वप्न बुलंद हुए !!
-विकास त्रिवेदी



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