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तालाब

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20 -Nov-2016 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  2,944 Views
Suresh Chandra Sarwahara

तालाब
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बना गाँव के बीच बड़ा - सा
इक सुन्दर तालाब ,
तट पर उगे हुए हैं जिसके
गेंदा और गुलाब ।
आम और जामुन के कितने
यहाँ वहाँ हैं पेड़ ,
गिरे हुए इनके पत्तों को
चरती बकरी भेड़ ।
हरियाली छाई है बढ़िया
इसके चारों ओर ,
सुन पड़ते हैं कभी बोलते
कोयल तोते मोर ।
तैर रही मछली को बगुले
ताके बैठ कतार ,
प्यास बुझाने यहीं कृषक ने
पशु भी दिए उतार ।
दिन भर ही तो बच्चे जल में
तैरा करते खूब ,
कपड़े धोती महिलाओं की
दूर करे यह ऊब ।
घाटों पर भी लोग नहाते
हम सकते हैं देख,
लगता है तालाब गाँव के
जीवन की है रेख ।
वर्षा जल के संरक्षण का
दे हमको संदेश ,
महकाता तालाब गाँव का
खुशियों से परिवेश ।
गाँव गाँव हर शहर शहर में
बने एक तालाब ,
जिससे जल संकट से अपना
हो ना हाल खराब ।
***
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

तालाब


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