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तमन्ना

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03 -Oct-2018 satyadeo vishwakarma 15 August Poem 0 Comments  697 Views
satyadeo vishwakarma

तमन्ना
जी में आता है इस माटी का अरमान हो जाऊँ ,
फरिश्ता हो नहीं सकता मगर इंसान हो जाऊँ ।
जहां मजहब भाषा क्षेत्र की चर्चा नहीं होती ,
इलाही चाहता हूँ खेल का मैदान हो जाऊँ ।
परिंदे उड़ सकें बेखौफ दिल खोल कर अपना ,
खुदा उनकी उड़ानों का मैं आसमान हो जाऊँ ।
हवा मुझको उड़ाकर जाने ले जाये कहाँ यारों ,
चाहता हूँ शहीदों का दीपदान हो जाऊँ ।
लौटा दो आज मथुरा कृष्ण राधा की इबादत का ,
चलो फिर आज मैं कान्हा का रसखान हो जाऊँ ।
मेरे आँचल से आकर हर कोई बच्चा लिपट जाए ,
तमन्ना है मेरी ऐसा ही हिंदुस्तान हो जाऊँ ।



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