Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

तेरे दर से उठे कदमों को

0
24 -Jul-2016 अनन्य Love Poem 0 Comments  1,350 Views
अनन्य

**तेरे दर से उठे कदमों को::गज़ल**

तेरे दर से उठे कदमों को किस मंज़िल का पता दूंगा मैं,
भटक जाऊंगा तेरी राह में और उम्र बिता दूंगा मैं l


हां मगर अपने होठों पे तेरा ज़िक्र ना आने दूंगा,
इस फसाने को अज़ल के लिये दिल में दबा दूंगा मैं l


मैं वफ़ा के समन्दर का इक नायाब सा मोती हूं,
तुझपे गर सज न सका तो अपनी हस्ती को मिटा दूंगा मैं l


तेरे पहलू में कभी था तो ज़िन्दगी का गुमां था मुझको,
अब तेरी यादों के शरारे में खुद को जला दूंगा मैं l


हां मगर तुझको जमाने में मेरे नाम से जानेंगे सभी,
अपनी गज़लों में तुझे कुछ ऐसे बसा दूंगा मैं l


मैं जानता हूं कि इक दिन तुझे अफ़सोस भी होगा,
हां मगर तब तलक़ खुद को तेरी राहों से हटा दूंगा मैं l


मैं जानता हूं के मैं सागर हूं और मेरी कश्ती भी मुझी में है,
और एक दिन खुद ही इस कश्ती को खुद में डुबा दूंगा मैं ll


All rights reserved.

-Er Anand Sagar Pandey

तेरे दर से उठे कदमों को


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017