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तेरी जय नवोदय

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17 -Mar-2020 Vijay Devgan Friendship Poems 0 Comments  219 Views
तेरी जय नवोदय

तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

कुर्बान तुझपे जगत की हर
शय नवोदय
तेरी जय नवोदय

खाली सफा था जब तेरे आँगन मे आया
तेरी ही ममता ने मुझे जीना सिखाया
सौ बार लिखा ज़िंदगी तूने मुझ पर
वो ही मेरी हर रग मे बहता है नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

इंसानियत का पाठ तुमने ही पढ़ाया
दिखला के असलियत मुझे बेडर बनाया
जब भी धर्म की आढ़ मे
होता गलत कुछ फटती है मेरे जहन में
कोई शय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

रोया हूँ जब बीता हुआ कल याद आया
बर्बाद था आबाद तुमने ही बनाया
आंशू था में तो शाद तुमने ही बनाया
यूँ ही नियाजे बांटता तू रह नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

तूफ़ा कोई भी मुझको आज हिला न पाये
फौलाद हूँ सूरज जिसे पिघला न पाये
राहों से अब कोई मुझे भटका न पाये
है राह मुझे दिखला रही इक लय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

अब "दियोल" को ये कहते कोई शर्म न है
की मेरी कोई जात कोई धर्म न है
छोड़ा ही तूने मुझमे कोई भ्रम न है
न ही कोई छोड़ा है तूने भय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय
कुर्बान तुझपे जगत की हर
शय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय
तेरी जय नवोदय

तेरी जय नवोदय


Dedicated to
All Navodayans Friends.

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