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तेरी सूरत(Teri Soorat)

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20 -Feb-2016 Swati Mishra Beauty Poems 0 Comments  2,201 Views
Swati Mishra

तेरी सादगी ज्यों देखी
रहा न ये मन अब अपना
तेरी वो नजाकत मुझे भा गई
तेरी वो शरारत मुझपे छा गई

गुलाब पंखुड़ियों सी कोमल है तू
सिहर उठे है जी जो छु लू इसे मैं
सुबह तुझसे ही हो,जब दिन हो शुरू
अज़ब सा है विस्मय कैसा ये समय?

बिम्ब दर्पण सी तेरी जो सूरत वो है
प्रेम दर्शन सी तेरी जो मूरत वो है
वही अदाएं आज मुझको हैं ले डूबी
बूँद अमृत की मुझे जरुरत जो है

देख तेरे आँखों के काजल
जो करें दिन में अँधेरा
तेरे केशुओं की छाया
छाया सुघर-सुन्दर घनेरा

तेरे कानो की वो बाली
बनाये मुझको सवाली
जिन्दगी जैसे थम सी जाए
आगे उसके मुझे कुछ न सुहाए

तेरे नाक की वो नथुनी
लगे श्रृंगार का अद्भुत रूप
है मुझे उनसे दोस्ती करनी
चमकती ऐसे,लगे अँधेरे में धूप

तुझमे बसा वो अज़ब सा जो नूर है
लगती जैसे तू उस देश की हूर है
बिना श्रृंगार के तू लगती है प्यारी
ईश्वर ने भी है क्या सूरत संवारी

है अब बस तेरा मुझको इन्तजार
इंतजार में कितने दिन दिए मैंने गुजार
काश मेरी दुवाओं का असर अब हो जाए
ये दिल अब बस तुझको ही पाना चाहे

#माही
http://terekhatir.blogspot.in/2016/02/teri-soorat.html



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