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Mulla Pandi Paadari Ke Changul Mein Hai Dharm

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09 -Sep-2015 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Terrorism poems 0 Comments  2,956 Views
Dr. Roopchandra Shastri Mayank

ऋषि-मुनियों के देश में, बिगड़ रहे दस्तूर।
दस्तूरों के नाम पर, मन में भरा फितूर।।
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अब मज़हब के नाम पर, होते ओछे कर्मं।
मुल्ला-पण्डित-पादरी, के चंगुल में धर्म।।
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शातिर लोगों ने किया, जीना यहाँ हराम।
ऐसे लोगों से हुई, कौम यहाँ बदनाम।।
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आते सीमा पार से, करने यहाँ गुनाह।
उनको देते किसलिए, घर में लोग पनाह।।
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देशद्रोह से कम नहीं, ऐसी सब करतूत।
छुरा ज़िगर में घोंपते, माता के ये पूत।।
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थोड़े से कुछ लोग ही, करते ऐसे काम।
लेकिन इससे हो रहे, मुसलमान बदनाम।।
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सर्वधर्म समभाव का, अपना भारत देश।
लेकिन ओछे काम से, बिगड़ रहा परिवेश।।
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सहन किया अब तक बहुत, नहीं सहा अब जाय।
करणी का फल मिलेगा, होगा निश्चित न्याय।।
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चेतो अब आतंकियों, कवि कर रहा सचेत।
संकेतों में दे रहा, तुमको ये संकेत।।

Mulla Pandi Paadari Ke Changul Mein Hai Dharm


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