Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

थकान और थकावट

0
10 -Dec-2018 सुमित.शीतल Motivational Poems 0 Comments  414 Views
सुमित.शीतल

नमस्ते साथियों,
कविता: थकान और थकावट

थक कर चूर हो गया ये शरीर का हर अंग,
फिर भी जाने कंहा तक चलना है।
जाने कंहा मिलेगी मंजिल,
नजर नही आ रहा अभी कोई आशियाना।
ये झंझट, ये रोड़े-पत्थर बड़ी मुसीबते है,
पड़ रही क्यों मुझ पर वक्त की दिक्कते है।
कभी दिल कहता है,चलते रहो,
कभी हारकर बैठने को करता है मन।
ये बेचैनी दिल की कब तक रहेगी,
कब तक मुसीबत बनेगा ये जालिम जमाना।
क्या मैं अब थक गया तो बैठ जाऊ,
सबकुछ सहते-सहते कुछ ऐसा कर जाऊ।
ना सुनु सबकी जो कहे और मैं करता जाऊ,
करू अपने मन की सोचकर क्या है मुझे पाना।
आँसू बहते है बहने दो कि बड़ा निष्ठुर है ये जमाना,
ये दिल तो है पगला कभी रोता तो कभी हंसता।
जिस्मे-पीड़ा को सहना भी बिछोह है,
जितना मुझे ये जमाने द्धारा पीड़ा देने का शौक है।
नयन मेरे ये बरस-बरस चले है,
बस थक गया हूं कि पूरा एक कदम चलना भी अब व्यर्थ है।
आज कैसा समय आया अलबेला है,
मैं और मेरा दर्द जो मुझे सहना अकेला है।
थक कर चूर हो गया ये शरीर का हर अंग,
फिर भी जाने कंहा तक चलना है।

समाप्त

शुक्रिया सहित धन्यवाद,

tc. sumit.m.



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017