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Waqt Ke Naam Khat

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19 -Mar-2013 Sohan Patel Time Poems 0 Comments  2,568 Views
Sohan Patel

किस किस के हो दोस्त?
किस किस को धोखा दे रहे हो?
किस किस को फसाया है अपने जाल मे?

तुम्हारे झूठे दिलासे के गर्भ में,
पल रहे हैं कई इन्तजार....
कह दो कि कितनों की उम्मीदों से,
तुमने बनाये हैं अवैध सम्बंन्ध.....

कम से कम इतना तो करो
या तो आ जाओ,
या बता दो कि अब नहीं आओगे.....

हर किसी के राह तकने की सीमाएं
अन्तहीन तो नही होती...

मैं जानता हूं कहीं बैठकर मुस्कुरा रहे होगे तुम
मना रहे होगे जश्न अपने नाजायज सम्बंधों का

तुमने ही तो बहाई है भेदभावों की ये नदी
जिसमें जो तैरना नहीं जानते
वो आंखिरकार डूब जाने के लिये बह रहे हैं

कब तक जिन्दा रखोगे उन्हें तिनके का सहारा देकर ?
कब तक लोगे अपने लिये उनके प्यार की परीक्षा ?

खून और पसीने की आंच पर
ये जो जि़न्दगी की अदृश्य चिता जल रही है
उस पर बैठे कई लोगों को कहते सुना है मैने
"मेरा वक्त एक दिन ज़रुर आयेगा....."

उन्हें मत सताओ बेवफा प्रेमियों की तरह
या तो आ जाओ
या बता दो कि अब नहीं आओगे.....



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