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तितली

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09 -Jul-2017 Suresh Chandra Sarwahara Butterfly Poem 0 Comments  1,517 Views
Suresh Chandra Sarwahara

तितली
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रंग बिरंगे पंखों वाली
फूल फूल मँडराती तितली,
संग हवा के ऊपर उठकर
मस्ती में लहराती तितली।
पंखों को पलकों - से झपका
बैठ धरा पर जाती तितली,
क्या करती है बातें गुपचुप
हमको नहीं बताती तितली।
अगर पकड़ने इसको दौड़ो
हाथ नहीं है आती तितली,
अपने पीछे दौड़ा दौड़ा
बच्चे खूब छकाती तितली।
डाल डाल उड़ती फिरती है
कलियों से बतियाती तितली,
पता नहीं चलता है इसका
कब सो रात बिताती तितली।
फूलों से फल को बनने में
अच्छा साथ निभाती तितली,
मौन सदा धारण करके भी
जीवन - राग सुनाती तितली।
अपनी अनुपम सुन्दरता से
सबके मन को भाती तितली,
ना पकड़ें ना मारें इसको
है इस जग की थाती तितली।
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- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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