Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

पेड़ / Ped

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18 -Jan-2019 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  381 Views
पेड़ / Ped

खड़े हुए हैं बिना थके ये रात दिवस हरियाले पेड़, कितने कितने फल देते हैं लेकिन खुद तो एक न चखते, चाहे कोई कुछ भी करता इससे तनिक न मतलब रखते। नहीं किसी की करें शिकायत मुँह पर धारे ताले पेड़। खुले गगन के नीचे पलते आतप व

शिक्षक पेड़

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17 -Oct-2018 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  464 Views
शिक्षक पेड़

कितना कुछ हमको सिखलाते सचमुच शिक्षक होते पेड़, मौन बने सब कुछ सह जाते धैर्य कभी ना खोते पेड़। धरती से उठ ऊँचे बढ़ते संघर्षों में पलते पेड़, रंग बदलती जब जब ऋतुएॅं साथ समय के ढलते पेड़। सहते धूप शीश के ऊपर छाँव और क

हरे पेड़

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05 -Mar-2018 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  922 Views
हरे पेड़

हरे पेड़ हैं भूमंडल पर मानव - जीवन के आधार, शुद्ध हवा का इनसे ही तो होता है जग में संचार। अगर नहीं हों हरे पेड़ तो धरती होगी रेगिस्तान, जीव जंतु का नहीं बचेगा दूर दूर तक नाम निशान। आदिकाल से देते आए पेड़ हमें सुविधा

वृक्ष

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25 -Sep-2017 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  4,618 Views
वृक्ष

वृक्ष _____ जीवन के आधार वृक्ष हैं ये हैं सुख के साधन, देव तुल्य हैं वृक्ष हमारे हो इनका आराधन। वृक्ष हमारे साथ रहे हैं बनकर सच्चे सहचर, साँस साँस के लिए जीव हर रहता इनपर निर्भर। पत्र पुष्प फल जड़ी बूटियाँ वृक्ष हमें

शीशम

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06 -May-2017 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  976 Views
शीशम

शीशम - - - - - - - - - - जग कठोर कहता है तुमको पता नहीं क्यों प्यारे शीशम, मुझको तो तुम लगते बिल्कुल कोमल कोमल रेशम रेशम । पात तुम्हारे कितने सुन्दर हो शिशु की ज्यों नर्म हथेली, जिसने निष्ठुर कठिन समय की नहीं अभी आघातें झेली

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