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तू और मैं

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01 -Aug-2020 © विक्रम Life Poem 0 Comments  120 Views
© विक्रम

रंज - ए - गम, बेखुदी और ये बेताबिया
कैसे करूं बयां मै तेरी कहानियां
तू गंगा के पावन जल सी है
मैं तुझमें तैरती नाव सा
तू रहती है चंद्रमा सी शीतल सदा
मै तो हूं एक जलते अलाव सा
तू है महक फूलों की
मैं मतवाले भेाैरें की चाल सा
तू है चंचल बिजली की तरह
मैं बे मौसम बरसात सा
तू है सुबह सूरज की लाली वाली
मै उसी सुबह के रात सा
तू मेरी रहे मै तेरा रहूं
बस चलता रहे ये सिलसिला...
©विक्रम

तू और मैं


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