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Tum bhi Samajhdar Ho

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26 -Jul-2020 Sunny Kapoor Education Poem 0 Comments  605 Views
Sunny Kapoor

*तुम भी समझदार हो*



दिल व्यथित है तुमको कैसे पता ना चला
गुरु तो चकित है तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम कर्णधार हो
*तुम भी तो समझदार हो ।।*

बात नहीं जिसका हल नहीं तुमको कैसे पता ना चला
गुरु का सम्मान छलनी तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम असरदार हो
*तुम भी तो समझदार हो।।*

क्या गलत क्या सही तुमको कैसे पता ना चला
हमारी शिक्षा व्यर्थ बही तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम हमारी शिक्षा का सार हो
*तुम भी तो समझदार हो ।।*

शिक्षा का तोल मूल्य नहीं तुमको कैसे पता ना चला
रत्न कोई इससे बहुमूल्य नही तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम तारणहार हो
*तुम भी तो समझदार हो ।।*

हमने तो हृदय समर्पित किया तुमको कैसे पता ना चला
तुम्हारी सफलता में स्वयं को अर्पित किया तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम खबरदार हो
*तुम भी तो समझदार हो ।।*

गर हमसे ग़लती हुई तुमको कैसे पता ना चला
चांदी हमारे मस्तक पर मलती हुई तुमको कैसे पता ना चला
तुम तो ऐसे ना थे
कह दो की तुम मल्हार हो
*तुम भी तो समझदार हो ।।*



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