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तुम जो गए

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23 -Feb-2020 Purushottam Kumar Sinha Bewafai Poems 2 Comments  275 Views
Purushottam Kumar Sinha

तुम जो गए, ख्वाब कैसे बो गए!

लेते गर सुधि,
ऐ, सखी,
सौंप देता, ये ख्वाब सारे,
सुध जो हारे,
बाँध देता, उन्हें आँचल तुम्हारे,
पल, वो सभी,
जो संग, तेरे गुजारे,
रुके हैं वहीं,
नदी के, वो ठहरे से धारे,
बहने दे जरा,
मन,
या
नयन,
सजल, सारे हो गए,
तुम जो गए!

तुम जो गए, ख्वाब कैसे बो गए!

सदियों हो गए,
सोए कहाँ,
जागे हैं, वो ख्वाब सारे,
बे-सहारे,
अनमस्क, बेसुध से वो धारे,
ठहरे वहीं,
सदियों, जैसे लगे हों,
पहरे कहीं,
मन के, दोनों ही किनारे,
ये कैसे इशारे,
जीते,
या
हारे,
पल, सारे खो गए,
तुम जो गए!

तुम जो गए, ख्वाब कैसे बो गए!

तुम जो गए


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2 More responses

  • Purushottam Sinha
    Purushottam Sinha (Registered Member)
    Commented on 09-March-2020

    @Ankita Singh
    बहुत-बहुत धन्यवाद अंकिता जी.

  • Ankita Singh
    Ankita Singh (Registered Member)
    Commented on 24-February-2020

    Bahut acchi Kavita hai.

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