Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

तुम से ही शुरुआत मेरी ...

0
11 -Feb-2019 Jay Saini Mothers Day Poem 0 Comments  144 Views
तुम से ही शुरुआत मेरी ...

तुम से ही शुरुआत मेरी तुम से ही सब सीखा है
तुम से दूर होकर मुझे जग लगता यह फीका है ,

सोने को तो सोता हूँ पर सपने थोड़ी देख पाता हुँ
तेरी गोद थोड़ी पास मेरे जो अब जल्दी ही सो जाता हूँ
कैसे कर लु खुद को पूरा तू भी तो एक हिस्सा है
तुम से ही शुरुआत मेरी तुम से ही सब सीखा है ,

खाने को तो खाता हूँ पर मन थोड़ी भर पाता है
तेरे हाथो का वो हलवा यहां थोड़ी मिल जाता है
कैसे मिटा लूँ भूख मेरी यहां तो सब कुछ तीखा है
तुम से ही शुरुआत मेरी तुम से ही सब सीखा है ,

सुनने को तो सुनता हूं पर तुझे थोड़ी सुन पाता हूँ
तेरी आवाज़ थोड़ी है पास मेरे जो लोरी कोई सुन पाता हूँ
कैसे सुन लु कहानी आधी तु भी तो एक किस्सा है
तुम से ही शुरुआत मेरी तुम से ही सब सीखा है ,

कहने को तो कहता हूँ पर तुझे थोड़ी कह पता हूँ
तू थोड़ी पास मेरे जो अब मन हल्का कर पता हूँ
कैसे मिटाऊ कड़वाहट मेरी तु ही तो एक मीठा है
तुम से ही शुरुआत मेरी तुम से ही सब सीखा है
तुम से दूर होकर मुझे जग लगता यह फीका है,



Dedicated to
My mother

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017