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उड़ान ।

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10 -May-2022 Harpreet Ambalvee Woman Poems 0 Comments  69 Views
Harpreet Ambalvee

मासूम सी हैं तुम्हारी आंखें,
कोमल से तुम्हारे पंख हैं,
उड़ान दूर की भरना चाहती हो,
जीवन में उलझने असंख्य है,

जज्बात तुम में है, कुछ कर गुज़रने का,
मगर, तुम पहचान नहीं पा रही हो,
बहुत कुछ कर सकती हो जीवन में,
मगर खुद को मना नहीं पा रही हो,

मैं उस उड़ान को देख रहा हूं ,
जब तुम आसमान में छा जाओगी,
तब तुम्हें अपने वजूद का एहसास होगा,
फिर खुद को बेचारी नहीं कहलावाओगी,

तुम क्यो बेवजह घबरा रही हो,
निराशा,धोखे भी इस जीवन का पाठ हैं,
इनसे खुद को क्यो बचा रही हो,

माना 'आदत-ए-ज़ख़्म-ए-सफ़र है तुम्हारा,
मगर तुम इनसे और मज़बूत बनो,
क्यो दुसरो को अपनी लाचारी दिखाती हो,
अपना मंजिलें ए रास्ता खुद चुनो,
डोर तुम्हारी, पतंग तुम्हारी,
फिर क्यो किसी और की सुनो,

लोग सिर्फ देखने का काम है करते,
तुम क्यो उन्हे मौका दिये जा रही हो,
जीवन तुम्हारा, सुख, दुख भी तुम्हारा,
फिर किसी पर निर्भरता कयो दिखा रही हो,

तुम्हे खुद अकेले ही लड़ना हैं,
हिमालय सी ऊंची ही क्यो न हो कठिनाई,
इसे खुद ही पार कर बढ़ना है,

सारांश यही कि उठो, बढ़ो और पंख फैलाओ,
अपनी ताकत पहले खुद को, फिर जग को दिखाओ,

तुम्हारी यह उड़ान सबसे ऊंची होगी,
हर खुशी, शोहरत तुम्हारे कदमों तले होगी,

बस अब व्यर्थ ना समय गवाओ,
तुम अपने अब पंख फैलाओ,
विजय की हर बुलन्दी को पा जाओ,
अमबालवी के शब्दो को सार्थक बनाओ।

उड़ान ।


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