Usaki marji....

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Usaki Marji: It is one of the best poem about waiting for someone you love. In this hindi poem lover remembers the golden moments they passed when they were together. But some unwanted situations made them apart. But the guy loves her so much that he could not forget her. He is still hoping that one day she will definitely return.

11 -Oct-2017 Saroj Sad Poems 0 Comments  47 Views
Saroj

uska aana meri jindagi me uska hi etbar tha,
or uska jana bhi meri jindagi se uska hi inkar hai,
ek ajib se mod pe hm mile ek suhani saam ko,
wo bhul gai hai saari baate pr mujhe to aaj bhi yaad hai,
mujhe uska ruthna bhi achcha lgta hai or pyaar bhi,
paas hota hu to najr nahi hatati meri,
or dur hota hu to yaado se nahi bichhadati kabhi,
mujhe to aaj bhi bus har lamhe me uska hi intjar hai...


uska aana meri jindagi me uska hi etbar tha,
or uska jana bhi meri jindagi se uska hi inkar hai,
do jism mil ke ek jaan hue the ham kabhi,
mohbbat ki raaho me mil ke badnam hue the kabhi,
ikarar tha do kadam ke faslo me bhi,
duriyo me bhi hm hmesa pas the kabhi,
saanse thi sanso se judi hmari,
dhakan pe ek likh tha tumhara hi naam kabhi....
mita diya usne bhale hi in yaado ko ,
par mera man aaj bhiuska naam gungunata hai,
uske baaho ka pyaar mujhe aaj bhi tadpata hai,
n jaane wo mere bare me sochati ha ki nahi kabhi,
jabki mere har panno me bus uska hi ijhar hai....



उसकी मर्जी….

उसका आना मेरी जिंदगी में उसका ही एतबार था ,
और उसका जाना भी मेरी जिंदगी से उसका ही इंकार है ,
एक अजीब से मोड़ पे हम मिले थे एक सुहानी साम को ,
वो भूल गई है सारी बाते पर मुझे तो आज भी याद है ,
मुझे उसका रूठना भी अच्छा लगता है और प्यार भी ,
पास होता हु तो नजर नहीं हटती मेरी ,
और दूर होता हु तो यादो से नहीं बिछडती कभी ,
मैहफिल में भी जाता तो वो मुझे नजर आती,
ऐसा लगता वो हर पल मेरे संग मेरी परछाई बन कर चलती ,
नींद में आकर वो मेरा ख्वाब भी बन जाती कभी ,
कभी आईने में देखु खुद को तो उसकी तश्वीर मुझे नजर आती ,
हर पल मेरा धड़कन बन कर अपने होने का रूबरू कराती ,
गुजारे थे जो मैंने उसके साथ वो हसीं पल ,
मुझे मेरी तन्हाई उसके न होने का एहसास दिलाते है ,
मुझे तो आज भी बस हर लम्हे में उसका ही इंतजार है …



उसका आना मेरी जिंदगी में उसका ही एतबार था ,
और उसका जाना भी मेरी जिंदगी से उसका ही इंकार है ,
दो जिस्म मिल के एक जान हुए थे हम कभी ,
मोहब्बत की राहो में मिल के बदनाम हुए थे कभी ,
इकरार था दो कदम के फसलों में भी ,
दूरियों में भी हम हमेसा पास थे कभी ,
साँसे थी सांसो से जुडी हमारी ,
धड़कन पे एक लिख था तुम्हारा ही नाम कभी ….
मिटा दिया उसने भले ही इन यादो को ,
पर मेरा मन आज भी उसका नाम गुनगुनाता है ,
उसके बाहो का प्यार मुझे आज भी तड़पता है ,
बेवजह वो वजह बन कर आज भी उसकी हसी मुझे रुलाती है,
कैसे बयां करू मैं किस कदर उसकी चाहत मुझे तरसाती है ,
न जाने वो मेरे बारे में सोचती है की नहीं कभी ,
जबकि मेरे हर पन्नो में बस उसका ही इजहार है ….



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