Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वायु प्रदूषण

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Vaayu Pardushan : Here is the best hindi poem on air pollution or vayu pardushan. This poem explain the cause of air pollution in our enviroment and their effect on our life. This poem also suggest some solutions to resolve or reduce the air pollution so that we can make a clean enviroment for our next generation.

30 -Nov-2017 Suresh Chandra Sarwahara Environment Poems 1 Comments  9,578 Views
Suresh Chandra Sarwahara

आज शहर में बढ़ा प्रदूषण
मुश्किल हुआ साँस का लेना,
शुद्ध हवा के बिन जीवन की
संभव नहीं नाव को खेना।
चारों ओर धुआँ है फैला
धुन्ध गगन में लगती छाई,
थोड़ी - सी दूरी की चीजें
पड़ती हैं अब नहीं दिखाई।
धरती पर कुहरा - सा छाया
घुटा घुटा - सा रहता है दम,
दुबके रहते लोग घरों में
निकल रहे हैं बाहर भी कम।
फैलाती हैं रोज प्रदूषण
धुआँ उगलती लाखों गाड़ी,
फिर भी रात दिवस बिन सोचे
पेड़ों पर चलती कुल्हाड़ी।
खेतों में उद्योग लग गए
जंगल में जा पहुँची बस्ती,
खेल रहे हैं हम कुदरत से
हुई जिन्दगी इससे सस्ती।
बिन सोचे हम चढ़े जा रहे
नव - विकास की कैसी सीढ़ी,
शुद्ध हवा के बिना हमारी
तड़प रही है जिससे पीढ़ी।
अगर बचाना है जीवन तो
रखें हवा का शुद्ध आवरण,
हो उत्सर्जित धुआँ न्यूनतम
और अधिकतम वृक्षारोपण।
धरती पर लाने हरियाली
पेड़ों को बच्चों - सा पालें,
छोड़ विषैला धुआँ हवा में
जीवन ना संकट में डालें।
******
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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1 More responses

  • poemocean logo
    Pari Kaushik (Guest)
    Commented on 30-August-2019

    Excellent poem it is very good I am very happy.

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