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वर्षा की मनमानी

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03 -Aug-2021 nil Raining Season Poem 0 Comments  428 Views
वर्षा की मनमानी

वर्षा की मनमानी

जब
वर्षा होती है
तो
होती है वर्षा ही

सब क्रियाएं
पड़ जाती ठप्पा

जो जहाॅ है
बहीं
हो जाता है कैद
किसान जोत नहीं पाता हल
चल नहीं पाता
राहगीर अपनी राह
हंसीं की उड़ानें रद्द होती
बटुक पहुंच नहीं पाते
अपनी अपनी पाठशाला
हर पानी डंडे भागता

जब मुसलाधार वर्षा होती
तो
डूब जाते नदी नाले
गांव शहर होजाते पानी पानी
सदियों की विरासतका
पता नहीं चलता
तिनके से बहते बाहन छानी-छप्पर
डूबते-उतराते नर-नारी -जानवर
पेड़ -पौधे

टेक देती घुटने
सारी दुनिया
वर्षा की मनमानी के आगे।



Dedicated to
सभी काव्य प्रेमियों को

Dedication Summary
उत्प्रेरक रचना

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