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वृद्धाश्रम / Vridhashram

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09 -Jan-2018 Jyoti Old People Poems 0 Comments  4,294 Views
Jyoti

आँसू जो मेरी आँखों
से बह निकले है
देखा है जबसे माँ - बाप
को वृद्धाश्रम में
बेटा ! मोल तुमनें भी
क्या है चुकाया
ममता का


आँखे माँ की बुनती थी
सपने अपने बच्चे के बड़े होने के
रातों को जगती थी
दिन में कामों में थकती थी


सोचती है वो भी आज
क्यों रखा था उसने तुझे
कोख में अपने नौ महीनें
फिर भी माँगती है दुआ
आज भी तेरी सलामती की
बेटा ! मोल तुमने भी क्या है
चुकाया ममता का


पापा ने उठाये थे बोझ
तेरी ख्वाहिशों के
दिया था तुझे प्यार ही प्यार
तेरी मुस्कुराहटों पर करते थे
वो अपनी जाँ निसार भी
बेटा ! मोल तुमने भी क्या है
चुकाया ममता का

वृद्धाश्रम / Vridhashram


Dedicated to
NGO helping hand

Dedication Summary
मैं अपनी इस कविता के माध्यम से उन युवाओं को अपने कर्त्तव्यों को याद दिलाना
चाहती हूँ जो अपने कर्तव्यों को भूल कर उम्र के इस पड़ाव पर अपने माता - पिता
को विद्धाश्रम में छोड़ आयें है

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