Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वृतांत

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Nitish kumar mishra 'योद्धा युग'

-----वृतांत----

उजियारों के तेज से ही हैं
प्रताप जगत का,
भूं की प्यास से ही हैं,
अमृत्व जीवन का!!
हरियत्व मे ही हैं,
औषध मधुर जन का!!
प्रकाशत्व के यौवन,
मे भी हो तुम।।
अंधेरों के सुमधुर धुन,
मे भी हो तुम।।
बस यहीं "वृत्तांत" संपूर्ण हो जाती हैं..

------फिर------

हर बात अंकित हो जाती हैं,
उन स्याह रातों में।।
हर ख्वाब सज जाती हैं,
उन अदृश्य साजों में।।
फिर भी कभी भी ना आती हैं,
मुट्ठी के मजबूत दबाबों मे।।
रेत सी कहीं निकल रही हैं,
धीरे धीरे मुझसे कहीं छूट रही हैं।।
थी उन अंतहीन रातों की नुमाइशे यहीं,
थी उन अबाध्य ख्वाबों की फरमाइशें भी यही।।
थी हकीकत की भी गुंजाइश यही..
निद्रा के आगोश मे बढ रहा हूँ,
धीमे धीमे सा कहीं थम सा रहा हूँ।।
ख्वाहिश बस इतनी ही बची थी मेरी..

कि---

कल्पना के इस रण मे वास्तव को करुं,
पुनजीर्वित फिर सें,
करुं अब नमन उनकों,
जिनके आंगन का पुष्प था मैं
जिनके नयन का लोचन था मैं
हो गया स्वप्न वो भी तो पूरा अब,
ऋण से उनके मुक्त मैं कभी हो ना पाउँगा
चंद क्षणों के मुस्कानों से मैं उन्हें पूजता,
अपने गंतव्य को प्रस्थान कर जाऊंगा।।
उम्मीद हैं इन कर्मों से वैकुंठ तो नहीं,
शायद वैतरणी के तट थोडी जगह पा जाउंगा।।
वक्त आ गया यम की मित्रता,
को करूँ स्वीकार अब।।
मोह माया को दूं त्याग अब,
जीवन को करुं,
सर्मपण अब।।।।

क्योंकि

यही हैं सपना यही हकीकत।।।।।

-- © नितिश कुमार मिश्रा"योद्धा"

वृतांत


Dedicated to
अपने नाना नानी जी को

Dedication Summary
क्योंकि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को उनसे ही ग्रहण किया है।। उनके आदर्शो संस्कारो ने जीवन के कठिन परिस्थितियों में भी मौलिक शक्ति, शकारात्मक ऊर्जा , ईमानदारीक नीतियों व् पारिस्तिथिक युद्ध कौशल के संघर्ष विध्य गुणों से सुसज्जित कर जीवन के इस रण को जूझने लायक शक्ति प्रदान की है।।

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