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वह जब भी मिलते हैं।

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14 -Dec-2021 ताज मोहम्मद Bewafai Poems 0 Comments  179 Views
ताज मोहम्मद

वह जब भी मिलते हैं मुझसे बात करते हैं अजनबियों की तरह |
अब तो वह लगते हैं मुझे किताबों में रखे सूखे फूलों की तरह ||1||

न जाने कितने दौर आए जिंदगी में मौसमों की तरह |
फिर भी हम इन्तजार करते रहे उनका सड़क पर लगे पत्थरों की तरह ||2||

बात होती है हमारी उनकी धूप में जैसे बारिशों की तरह |
मिलने के वक्त उनको जाना होता है शाम के परिंदों की तरह ||3||

कितनी कोशिश करता हूं ना याद आए वह मुझें अपनों की तरह |
पर हर कोशिश बेकार होती है मेरी फिरऔन की तरह ||4||

तबीब समझकर हमने जिंदगी दे दी उनको मरीजों की तरह |
फिर वह मुझे क्यों दिखता है कुछ-कुछ मेरें कातिलों की तरह ||5||

बदनाम ना करेंगे हम तुमको तुम्हारे रकीबों की तरह |
क्योकि चाहा है हमने तुमको बडा शरीफों की तरह ||6||

राजदार तुझको क्या बनाया मैनें अपनों की तरह |
मेरी बरबादी मे तुम भी शामिल हो गये मेरे दुश्मनों की तरह ||7||

ताज मोहम्मद
लखनऊ



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