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वतन की मिट्टी...

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14 -Aug-2019 Sunita Wahal 15 August Poem 0 Comments  349 Views
वतन की मिट्टी...

वतन की मिट्टी...


सपने होंगे रंग बिरंगी
दिल में होगी परी फ़िरंगी
परदेसी दुनिया सतरंगी
मुद्रा डौलर की बहुरंगी
फ़िर भी कर लो लाख कोशिशें
मातृभूमि याद आएगी
वतन की मिट्टी तुम्हें बुलाएगी


जब-जब होगी हवा बसंती
गायेगी कोयल जैवंती
अमराई में बौर लगेगी
सोंधी खुशबू आएगी
मातृभूमि याद आएगी
वतन की मिट्टी तुम्हें बुलाएगी



पूजा के जब थालसजेंगे
दूर कहीं जब शंख बजेंगे
कलियाँ पथ पर खूब सजेंगी
सजदे में जब हाथ उठेंगे
मातृभूमि याद आएगी
वतन की मिट्टी तुम्हें बुलाएगी


दूर कहीं जब डोल बजेगा
मन मयूर जब नाच उठेगा
गोरे हाथों की चूड़ी की
ख़नक ठिठक जब जाएगी
मातृभूमि याद आएगी
वतन की मिट्टी तुम्हें बुलाएगी






'सुनीता वहाल' ……



Dedicated to
India (Prime Minister of India)

Dedication Summary
यह कविता उन बच्चों के लिए है जो विदेश में रह रहे हैं I उनके मन में देशभक्ति को बनाये रखने के लिए यह पोएम लिखी है I

जय हिन्द

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