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Thithur Rahi Gaurya

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09 -Nov-2014 Dr. Parshuram Shukla Winter Season Poem 0 Comments  3,320 Views
Dr. Parshuram Shukla

मम्मी! देखो छत के ऊपर,
ठिठुर रही गौरैया।

जाड़े ने क्या रूप दिखाया।
सूरज को भी दूर भगाया।
कोहरा, ओस साथ में लेकर,
नाचे ता-ता थैया।
ठिठुर ...............

मुँह से भाप निकलती ऐसे।
धुआँ छोड़ता इंजन जैसे।
सूट बूट सब पहने लेकिन,
याद आ रही मैया।
ठिठुर ...............

जाड़ा करे खूब मनमानी।
लेकिन दीदी बड़ी सयानी।
मेरा हाथ पकड़ कर बोली,
चलो घूमने भैया।
ठिठुर ................

मम्मी देखो छत के ऊपर,
ठिठुर रही गौरैया।



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